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मंगलवार, 25 अगस्त 2009

बताओ करें तो करें क्या ...................??????

हाँ हाँ यादो में है अब भी ,
क्या सुरीला वो जहाँ था ,
हमारे हाथो में रंगीन गुब्बारे थे
और दिल में महेकता समां था ..........

वो खवाबो की थी दुनिया ..........
वो किताबो की थी दुनिया ..................
साँसों में थे मचलते ज़लज़ले और
आँखों में 'वो' सुहाना नशा था |

वो जमी थी , आसमां था ...........
हम खड़े थे ,
क्या पता था ???
हम खड़े थे जहाँ पर उसी के किनारे एक गहेरा सा 'अंधा कुआँ' था ..................

फ़िर 'वो' आए 'भीड़' बन कर ,
हाथो में थे 'उनके' खंज़र ................
बोले फैंको यह किताबे , और संभालो यह सलाखें !!!
यह जो गहेरा सा 'कुआँ' है ................
हाँ .... हाँ .... 'अंधा' तो नहीं है !!
इस 'कुएं' में है 'खजाना' ......
कल की दुनिया तो 'यही' है ....

कूद जाओ ले के खंज़र ......
काट डालो जो हो अन्दर ............
तुम ही कल के हो..............


'शिवाजी'
..........



तुम ही कल के हो ...............



'सिकंदर'
................ ||






हम ने 'वो' ही किया जो 'उन्होंने' कहा,

क्युकी 'उनकी' तो 'खवहिश' यही थी ......
हम नहीं जानते यह भी कि क्यों 'यह' किया .............

क्युकी 'उनकी' 'फरमाइश' यही थी |


अब हमारे लगा 'ज़एका' 'खून' का .........
अब बताओ करें तो करें क्या ???
नहीं है 'कोई' जो हमें कुछ बताएं ..............
बताओ करें तो करें ..............

'क्या' ??????









फ़िल्म :- गुलाल ; संगीत :- पियूष मिश्रा ; गीतकार :- पियूष मिश्रा



10 टिप्‍पणियां:

  1. फिल्म गुलाल के इस गीत की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए आपने उम्दा चित्रों से इसे पुन जिवंत कर दिया..

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  2. शिवम जी...अन्दाज़े बयां का ये नया ही अन्दाज़ देखा...प्रभावित किया इस पोस्ट ने...

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  3. बेहतरीन चित्रमय प्रस्तुति, सचमुच सोचने लगा, करें तो क्या करे..............

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  4. बहुत बढिया चित्रमय प्रस्तुति।बधाई।

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  5. बहुत ही सुंदर रूप से बढ़िया तस्वीरों के साथ आपने प्रस्तुत किया है ! बहुत अच्छा लगा !

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  6. जब पहली बार इस गाने को सुना था तो सिहर उठा था...और तब से जाने कितनी बार सुन चुका हूँ। उस दिन जब आपने फोन पर इस बाबत बताया था, तभी से उत्सुक था इस पोस्ट को देखने के लिये।

    अभूतपूर्व चित्रमय प्रस्तुति गाने की। a real good one shivam ji

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