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शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

अमर क्रांतिकारी बसंत कुमार बिस्वास की १२६ वीं जयंती

 

युवा क्रांतिकारी व देशप्रेमी श्री बसंत कुमार बिस्वास (6 फ़रवरी 1895 - 11 मई 1915) बंगाल के प्रमुख क्रांतिकारी संगठन " युगांतर " के सदस्य थे। उन्होंने अपनी जान पर खेल कर वायसराय लोर्ड होर्डिंग पर बम फेंका था और इस के फलस्वरूप उन्होंने 20 वर्ष की अल्पायु में ही देश पर अपनी जान न्योछावर कर दी।
 
जीवनी
 
इनका जन्म 6 फ़रवरी 1895 को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के पोरागाच्चा (Poragachha,) नामक स्थान पर हुआ था।
 
वायसराय लोर्ड होर्डिंग की हत्या की योजना क्रांतिकारी रास बिहारी बोस ने बनायीं थी और बम फेंकने वालों में बसंत बिस्वास और मन्मथ बिस्वास प्रमुख थे। बसंत बिस्वास ने महिला का वेश धारण किया और 23 -दिसंबर, 1912 को, जब कलकत्ता से दिल्ली राजधानी परिवर्तन के समय वायसराय लोर्ड होर्डिंग समारोहपूर्वक दिल्ली में प्रवेश कर रहा था तब चांदनी चोक में उसके जुलूस पर बम फेंका, पर वह बच गया।
 
इस कांड में 26 -फ़रवरी, 1912 को ही बसंत को पुलिस ने पकड़ लिया। बसंत सहित अन्य क्रांतिकारियों पर 23 -मई, 1914 को "दिल्ली षड्यंत्र केस" या "दिल्ली-लाहोर षड्यंत्र केस" चलाया गया। बसंत को आजीवन कारावास की सजा हुई किन्तु दुष्ट अंग्रेज सरकार तो उन्हें फांसी देना चाहता था इसीलिए उसने लाहोर हाईकोर्ट में अपील की और अंतत बसंत बिस्वास को बाल मुकुंद, अवध बिहारी व मास्टर अमीर चंद के साथ फांसी की सजा दी गयी। जबकि रास बिहारी बोस गिरफ़्तारी से बचते हुए जापान पहुँच गए।
 
11 मई 1915 को पंजाब की अम्बाला सेंट्रल जेल में इस युवा स्वतंत्रता सेनानी को मात्र 20 वर्ष की आयु में फांसी दे दी गयी। स्वतंत्रता संग्राम के दोरान अत्यधिक छोटी उम्र में शहीद होने वालों में से बसंत बिस्वास भी एक हैं।
 
आज इन की १२६ वीं जयंती के अवसर पर हम सब इन्हें शत शत नमन करते हैं |

शनिवार, 11 मई 2019

युवा क्रांतिकारी अमर शहीद बसंत कुमार बिस्वास की १०४ वीं पुण्यतिथि

 
युवा क्रांतिकारी व देशप्रेमी श्री बसंत कुमार बिस्वास (6 फ़रवरी 1895 - 11 मई 1915) बंगाल के प्रमुख क्रांतिकारी संगठन " युगांतर " के सदस्य थे। उन्होंने अपनी जान पर खेल कर वायसराय लोर्ड होर्डिंग पर बम फेंका था और इस के फलस्वरूप उन्होंने 20 वर्ष की अल्पायु में ही देश पर अपनी जान न्योछावर कर दी।
जीवनी
इनका जन्म 6 फ़रवरी 1895 को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के पोरागाच्चा (Poragachha,) नामक स्थान पर हुआ था।
वायसराय लोर्ड होर्डिंग की हत्या की योजना क्रांतिकारी रास बिहारी बोस ने बनायीं थी और बम फेंकने वालों में बसंत बिस्वास और मन्मथ बिस्वास प्रमुख थे। बसंत बिस्वास ने महिला का वेश धारण किया और 23 -दिसंबर, 1912 को, जब कलकत्ता से दिल्ली राजधानी परिवर्तन के समय वायसराय लोर्ड होर्डिंग समारोहपूर्वक दिल्ली में प्रवेश कर रहा था तब चांदनी चोक में उसके जुलूस पर बम फेंका, पर वह बच गया।
इस कांड में 26 -फ़रवरी, 1912 को ही बसंत को पुलिस ने पकड़ लिया। बसंत सहित अन्य क्रांतिकारियों पर 23 -मई, 1914 को "दिल्ली षड्यंत्र केस" या "दिल्ली-लाहोर षड्यंत्र केस" चलाया गया। बसंत को आजीवन कारावास की सजा हुई किन्तु दुष्ट अंग्रेज सरकार तो उन्हें फांसी देना चाहता था इसीलिए उसने लाहोर हाईकोर्ट में अपील की और अंतत बसंत बिस्वास को बाल मुकुंद, अवध बिहारी व मास्टर अमीर चंद के साथ फांसी की सजा दी गयी। जबकि रास बिहारी बोस गिरफ़्तारी से बचते हुए जापान पहुँच गए।
11 मई 1915 को पंजाब की अम्बाला सेंट्रल जेल में इस युवा स्वतंत्रता सेनानी को मात्र 20 वर्ष की आयु में फांसी दे दी गयी। स्वतंत्रता संग्राम के दोरान अत्यधिक छोटी उम्र में शहीद होने वालों में से बसंत बिस्वास भी एक हैं।
आज इन की १०४ वीं पुण्यतिथि के अवसर पर हम सब इन्हें शत शत नमन करते हैं |

बुधवार, 6 फ़रवरी 2019

अमर क्रांतिकारी बसंत कुमार बिस्वास की १२४ वीं जयंती

युवा क्रांतिकारी व देशप्रेमी श्री बसंत कुमार बिस्वास (6 फ़रवरी 1895 - 11 मई 1915) बंगाल के प्रमुख क्रांतिकारी संगठन " युगांतर " के सदस्य थे। उन्होंने अपनी जान पर खेल कर वायसराय लोर्ड होर्डिंग पर बम फेंका था और इस के फलस्वरूप उन्होंने 20 वर्ष की अल्पायु में ही देश पर अपनी जान न्योछावर कर दी।
जीवनी
इनका जन्म 6 फ़रवरी 1895 को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के पोरागाच्चा (Poragachha,) नामक स्थान पर हुआ था।
वायसराय लोर्ड होर्डिंग की हत्या की योजना क्रांतिकारी रास बिहारी बोस ने बनायीं थी और बम फेंकने वालों में बसंत बिस्वास और मन्मथ बिस्वास प्रमुख थे। बसंत बिस्वास ने महिला का वेश धारण किया और 23 -दिसंबर, 1912 को, जब कलकत्ता से दिल्ली राजधानी परिवर्तन के समय वायसराय लोर्ड होर्डिंग समारोहपूर्वक दिल्ली में प्रवेश कर रहा था तब चांदनी चोक में उसके जुलूस पर बम फेंका, पर वह बच गया।
इस कांड में 26 -फ़रवरी, 1912 को ही बसंत को पुलिस ने पकड़ लिया। बसंत सहित अन्य क्रांतिकारियों पर 23 -मई, 1914 को "दिल्ली षड्यंत्र केस" या "दिल्ली-लाहोर षड्यंत्र केस" चलाया गया। बसंत को आजीवन कारावास की सजा हुई किन्तु दुष्ट अंग्रेज सरकार तो उन्हें फांसी देना चाहता था इसीलिए उसने लाहोर हाईकोर्ट में अपील की और अंतत बसंत बिस्वास को बाल मुकुंद, अवध बिहारी व मास्टर अमीर चंद के साथ फांसी की सजा दी गयी। जबकि रास बिहारी बोस गिरफ़्तारी से बचते हुए जापान पहुँच गए।
11 मई 1915 को पंजाब की अम्बाला सेंट्रल जेल में इस युवा स्वतंत्रता सेनानी को मात्र 20 वर्ष की आयु में फांसी दे दी गयी। स्वतंत्रता संग्राम के दोरान अत्यधिक छोटी उम्र में शहीद होने वालों में से बसंत बिस्वास भी एक हैं।
आज इन की १२४ वीं जयंती के अवसर पर हम सब इन्हें शत शत नमन करते हैं |

गुरुवार, 11 मई 2017

युवा क्रांतिकारी अमर शहीद बसंत कुमार बिस्वास की १०२ वीं पुण्यतिथि

युवा क्रांतिकारी व देशप्रेमी श्री बसंत कुमार बिस्वास (6 फ़रवरी 1895 - 11 मई 1915) बंगाल के प्रमुख क्रांतिकारी संगठन " युगांतर " के सदस्य थे। उन्होंने अपनी जान पर खेल कर वायसराय लोर्ड होर्डिंग पर बम फेंका था और इस के फलस्वरूप उन्होंने 20 वर्ष की अल्पायु में ही देश पर अपनी जान न्योछावर कर दी।

जीवनी

इनका जन्म 6 फ़रवरी 1895 को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के पोरागाच्चा (Poragachha,) नामक स्थान पर हुआ था।

वायसराय लोर्ड होर्डिंग की हत्या की योजना क्रांतिकारी रास बिहारी बोस ने बनायीं थी और बम फेंकने वालों में बसंत बिस्वास और मन्मथ बिस्वास प्रमुख थे। बसंत बिस्वास ने महिला का वेश धारण किया और 23 -दिसंबर, 1912 को, जब कलकत्ता से दिल्ली राजधानी परिवर्तन के समय वायसराय लोर्ड होर्डिंग समारोहपूर्वक दिल्ली में प्रवेश कर रहा था तब चांदनी चोक में उसके जुलूस पर बम फेंका, पर वह बच गया।

इस कांड में 26 -फ़रवरी, 1912 को ही बसंत को पुलिस ने पकड़ लिया। बसंत सहित अन्य क्रांतिकारियों पर 23 -मई, 1914 को "दिल्ली षड्यंत्र केस" या "दिल्ली-लाहोर षड्यंत्र केस" चलाया गया। बसंत को आजीवन कारावास की सजा हुई किन्तु दुष्ट अंग्रेज सरकार तो उन्हें फांसी देना चाहता था इसीलिए उसने लाहोर हाईकोर्ट में अपील की और अंतत बसंत बिस्वास को बाल मुकुंद, अवध बिहारी व मास्टर अमीर चंद के साथ फांसी की सजा दी गयी। जबकि रास बिहारी बोस गिरफ़्तारी से बचते हुए जापान पहुँच गए।

11 मई 1915 को पंजाब की अम्बाला सेंट्रल जेल में इस युवा स्वतंत्रता सेनानी को मात्र 20 वर्ष की आयु में फांसी दे दी गयी। स्वतंत्रता संग्राम के दोरान अत्यधिक छोटी उम्र में शहीद होने वालों में से बसंत बिस्वास भी एक हैं।

आज इन की १०२ वीं पुण्यतिथि के अवसर पर हम सब इन्हें शत शत नमन करते हैं |

शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

नेताओं को 'रुलाने वाले' कार्टूनिस्ट तैलंग नहीं रहे

कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग (1960 - 06/02/2016)
देश के जाने माने कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग का शनिवार को निधन हो गया।  तैलंग ब्रेन कैंसर से पीड़ित थे। 
वे मूल रूप से राजस्थान के बीकानेर से ताल्लुक रखते थे। 1960 में जन्मे सुधीर ने महज़ 10 वर्ष में ही पहला कार्टून बनाया था। बतौर प्रोफेशनल कार्टूनिस्ट उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1982 को मुंबई में इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया के साथ की। 
1983 में सुधीर तैलंग ने दिल्ली में नवभारत टाइम्स के साथ अपनी नई पारी शुरू की।  इसके बाद वे कई सालों तक देश के प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के लिए कार्टूनिस्ट के तौर पर जुड़े रहे ।
इसी दौरान अन्य अंग्रेजी दैनिक अखबारों में भी उनके बनाये कार्टून, ब्लॉग, विचार और टिप्पणियाँ समय-समय पर प्रकाशित होती रहीं। समसामयिक विषयों पर उनकी पकड़ और राजनीति मसलों पर उनके कार्टून में हमेशा से सराहे गए।
तैलंग को कार्टून क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए 2004 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।
हाल ही में उन्होंने ‘नो, प्राइम मिनिस्टर’ शीर्षक से अपनी पुस्तक भी लांच की थी। इस पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जुड़े कार्टून्स की श्रृंखला शामिल थी।
उनके बनाए कुछ कार्टूनों पर एक नज़र डालिए-
दिल्ली रेप कांड और महिला सुरक्षा की खामियों पर कटाक्ष

मशहूर संगीतकार जुबेन मेहता के श्रीनगर कॉन्सर्ट और चरमपंथियों का विरोध

महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न नेताओं के बड़बोलेपन पर कटाक्ष

2014 आम चुनावों से पहले बीजेपी की अंतर कलह

2014 आम चुनावों मे प्रचार रेस मे जुटे मोदी और केजरीवाल

अपना कार्टून बनाने पर एक कार्टूनिस्ट को जेल भेजने वाली बंगाल की मुख्यमंत्री ममता पर कटाक्ष

अर्थव्यवस्था पर प्रधानमंत्री सिंह और वितमंत्री मुखर्जी की पकड़ पर कटाक्ष
  कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग साहब को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि और शत शत नमन |

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