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शनिवार, 30 जून 2012

अलविदा पिंकी मौसी ...

"जिस तरह तुम गयी ... कोई नहीं है जाता ...
टूट रहा हूँ मैं ... तुम से माँ का सा नाता ..."





जाओ खूब खुश हो कर जाओ,
और जाते जाते यह भी जान जाओ,
जिसने हर बार की तकरार तुमसे न जाने किन किन बातों पर,
वही मैं आज यह कहता हूँ बहुत याद आओगी तुम न जाने किन किन बातों पर !!
बहुत कुछ सहा तुम ने ता-उमर,अब बहुत हुआ जहाँ भी रहो खुश रहना,
'उससे' कर देना शिकायत,
नहीं तुम्हे है अब कुछ सहना,
बस मौसी अब खुश रहना !!

अलविदा पिंकी मौसी ...

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