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बुधवार, 3 जुलाई 2019

भारतीय सेना के दो महानायकों को समर्पित - ३ जुलाई का दिन

आज ३ जुलाई है ... आज का दिन समर्पित है ... भारतीय सेना के दो महानायकों को ... यह दोनों महानायक आज भी हर सैनिक के लिए प्रेरणा बने हुये है | आज इन दोनों की ही पुण्यतिथि है |

पहले महानायक हैं ...

अमर शहीद ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान,महावीर चक्र विजेता (मरणोपरांत)
ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान (जन्म:15 जुलाई 1912 आज़मगढ़ – मृत्यु: 3 जुलाई 1948) भारतीय सेना के एक उच्च अधिकारी थे जो भारत और पाकिस्तान के प्रथम युद्ध (1947-48) में शहीद हो गये। उस्मान 'नौशेरा के शेर के' रूप में ज्यादा जाने जाते हैं। वह भारतीय सेना के सर्वाधिक प्रतिष्ठित और साहसी सैनिकों में से एक थे, जिन्होंने जम्मू में नौशेरा के समीप झांगर में मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण गंवा दिए थे। मरणोपरांत उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।  
 
आज नौशेरा के शेर - ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की ७१ वीं पुण्यतिथि पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
 
और दूसरे महानायक हैं ...
 
अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे,परमवीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) 
कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे, (२५/०६/१९७५ - ०३/०७/१९९९) भारतीय सेना की १/११ गोरखा राइफल्स के अधिकारी थे ... १९९९ के कारगिल युद्ध के दौरान उनके अदम्य साहस और वीरतापूर्ण रण कौशल के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था | यह सम्मान उन्हें मरणोपरांत पदान किया गया था |
 
आज परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की २० वीं पुण्यतिथि के अवसर पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
 
जय हिन्द !!
 
जय हिन्द की सेना !!

मंगलवार, 25 जून 2019

परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की ४४ वीं जयंती

 
 
मनोज कुमार पांडेय (25 जून 1975, सीतापुर, उत्तर प्रदेश -- 3 जुलाई 1999, कश्मीर), भारतीय सेना के अधिकारी थे जिन्हें सन १९९९ मे मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
 
प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
 
पांडेय का जन्म 25 जून 1975 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के रुधा गाँव में हुआ था। उनके पिता गोपीचन्द्र पांडेय तथा माँ के नाम मोहिनी था। मनोज की शिक्षा सैनिक स्कूल लखनऊ में हुई और वहीं से उनमें अनुशासन भाव तथा देश प्रेम की भावना संचारित हुई जो उन्हें सम्मान के उत्कर्ष तक ले गई। इन्हें बचपन से ही वीरता तथा सद्चरित्र की कहानियाँ उनकी माँ सुनाया करती थीं और मनोज का हौसला बढ़ाती थीं कि वह हमेशा जीवन के किसी भी मोड पर चुनौतियों से घबराये नही और हमेश सम्मान तथा यश की परवाह करे। इंटरमेडियेट की पढ़ाई पूरी करने के बाद मनोज प्रतियोगिता में सफल होने के पश्चात पुणे के पास खडकवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में दाखिला लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के पश्चात वे 11 गोरखा रायफल्स रेजिमेंट की पहली वाहनी के अधिकारी बनें।
 
करियर
“जिस समय राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के च्वाइस वाले कालम जहाँ यह लिखना होता हैं कि वह जीवन में क्या बनना चाहते हैं क्या पाना चाहते हैं वहां सब लिख रहे थे कि, किसी को चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ बनना चाहता हैं तो कोई लिख रहा था कि उसे विदेशों में पोस्टिंग चाहिए आदि आदि, उस फार्म में देश के बहादुर बेटे ने लिखा था कि उसे केवल और केवल परमवीर चक्र चाहिए”
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षण के पश्चात वे बतौर एक कमीशंड ऑफिसर ग्यारहवां गोरखा राइफल्स की पहली बटालियन में तैनात हुये। उनकी तैनाती कश्मीर घाटी में हुई। एक बार मनोज को एक टुकड़ी लेकर गश्त के लिए भेजा गया। उनके लौटने में बहुत देर हो गई। इससे सबको बहुत चिंता हुई। जब वह अपने कार्यक्रम से दो दिन देर कर के वापस आए तो उनके कमांडिंग ऑफिसर ने उनसे इस देर का कारण पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया, 'हमें अपनी गश्त में उग्रवादी मिले ही नहीं तो हम आगे चलते ही चले गए, जब तक हमने उनका सामना नहीं कर लिया।' इसी तरह, जब इनकी बटालियन को सियाचिन में तैनात होना था, तब मनोज युवा अफसरों की एक ट्रेनिंग पर थे। वह इस बात से परेशान हो गये कि इस ट्रेनिंग की वजह से वह सियाचिन नहीं जा पाएँगे। जब इस टुकड़ी को कठिनाई भरे काम को अंजाम देने का मौका आया, तो मनोज ने अपने कमांडिंग अफसर को लिखा कि अगर उनकी टुकड़ी उत्तरी ग्लेशियर की ओर जा रही हो तो उन्हें 'बाना चौकी' दी जाए और अगर कूच सेंट्रल ग्लोशियर की ओर हो, तो उन्हें 'पहलवान चौकी' मिले। यह दोनों चौकियाँ दरअसल बहुत कठिन प्रकार की हिम्मत की माँग करतीं हैं और यही मनोज चाहते थे। आखिरकार मनोज कुमार पांडेय को लम्बे समय तक 19700 फीट ऊँची 'पहलवान चौकी' पर डटे रहने का मौका मिला, जहाँ इन्होंने पूरी हिम्मत और जोश के साथ काम किया।
 
ऑपरेशन विजय और वीरगति

पाकिस्तान के साथ कारगिल युद्ध के कठिन मोर्चों में एक मोर्चा खालूबार का था जिसको फ़तह करने के लिए कमर कस कर उन्होने अपनी 1/11 गोरखा राइफल्स की अगुवाई करते हुए दुश्मन से जूझ गए और जीत कर ही माने। हालांकि, इन कोशिशों में उन्हें अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी। वे 24 वर्ष की उम्र जी देश को अपनी वीरता और हिम्मत का उदाहरण दे गए।

फिल्म
 
कैप्टन मनोज के जीवन और उनकी वीरता को वर्ष 2003 में बनी एक फिल्म 'एल ओ सी कारगिल' में दर्शाया गया , जिसमें उनके किरदार को अजय देवगन ने अभिनीत किया।

सम्मान
 
कारगिल युद्ध में असाधारण बहादुरी के लिए उन्हें सेना का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र (मरणोपरांत) से अलंकृत किया गया। सारा देश उनकी बहादुरी को प्रणाम करता है।
 
 
आज परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की ४४ वीं जयंती के अवसर पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
 
जय हिन्द !!

जय हिन्द की सेना !!

मंगलवार, 3 जुलाई 2018

भारतीय सेना के दो महानायकों को समर्पित - ३ जुलाई

आज ३ जुलाई है ... आज का दिन समर्पित है ... भारतीय सेना के दो महानायकों को ... यह दोनों महानायक आज भी हर सैनिक के लिए प्रेरणा बने हुये है | आज इन दोनों की ही पुण्यतिथि है |

पहले महानायक हैं ...

अमर शहीद ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान,महावीर चक्र विजेता (मरणोपरांत)
ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान (जन्म:15 जुलाई 1912 आज़मगढ़ – मृत्यु: 3 जुलाई 1948) भारतीय सेना के एक उच्च अधिकारी थे जो भारत और पाकिस्तान के प्रथम युद्ध (1947-48) में शहीद हो गये। उस्मान 'नौशेरा के शेर के' रूप में ज्यादा जाने जाते हैं। वह भारतीय सेना के सर्वाधिक प्रतिष्ठित और साहसी सैनिकों में से एक थे, जिन्होंने जम्मू में नौशेरा के समीप झांगर में मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण गंवा दिए थे। मरणोपरांत उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।  
 
आज नौशेरा के शेर - ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की ७० वीं पुण्यतिथि पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
 
और दूसरे महानायक हैं ...
 
अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे,परमवीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) 
कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे, (२५/०६/१९७५ - ०३/०७/१९९९) भारतीय सेना की १/११ गोरखा राइफल्स के अधिकारी थे ... १९९९ के कारगिल युद्ध के दौरान उनके अदम्य साहस और वीरतापूर्ण रण कौशल के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था | यह सम्मान उन्हें मरणोपरांत पदान किया गया था |
 
आज परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की १९ वीं पुण्यतिथि के अवसर पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
 
जय हिन्द !!
 
जय हिन्द की सेना !!

सोमवार, 25 जून 2018

अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की ४३ वीं जयंती

 
मनोज कुमार पांडेय (25 जून 1975, सीतापुर, उत्तर प्रदेश -- 3 जुलाई 1999, कश्मीर), भारतीय सेना के अधिकारी थे जिन्हें सन १९९९ मे मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
पांडेय का जन्म 25 जून 1975 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के रुधा गाँव में हुआ था। उनके पिता गोपीचन्द्र पांडेय तथा माँ के नाम मोहिनी था। मनोज की शिक्षा सैनिक स्कूल लखनऊ में हुई और वहीं से उनमें अनुशासन भाव तथा देश प्रेम की भावना संचारित हुई जो उन्हें सम्मान के उत्कर्ष तक ले गई। इन्हें बचपन से ही वीरता तथा सद्चरित्र की कहानियाँ उनकी माँ सुनाया करती थीं और मनोज का हौसला बढ़ाती थीं कि वह हमेशा जीवन के किसी भी मोड पर चुनौतियों से घबराये नही और हमेश सम्मान तथा यश की परवाह करे। इंटरमेडियेट की पढ़ाई पूरी करने के बाद मनोज प्रतियोगिता में सफल होने के पश्चात पुणे के पास खडकवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में दाखिला लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के पश्चात वे 11 गोरखा रायफल्स रेजिमेंट की पहली वाहनी के अधिकारी बनें।
करियर
“जिस समय राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के च्वाइस वाले कालम जहाँ यह लिखना होता हैं कि वह जीवन में क्या बनना चाहते हैं क्या पाना चाहते हैं वहां सब लिख रहे थे कि, किसी को चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ बनना चाहता हैं तो कोई लिख रहा था कि उसे विदेशों में पोस्टिंग चाहिए आदि आदि, उस फार्म में देश के बहादुर बेटे ने लिखा था कि उसे केवल और केवल परमवीर चक्र चाहिए”
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षण के पश्चात वे बतौर एक कमीशंड ऑफिसर ग्यारहवां गोरखा राइफल्स की पहली बटालियन में तैनात हुये। उनकी तैनाती कश्मीर घाटी में हुई। एक बार मनोज को एक टुकड़ी लेकर गश्त के लिए भेजा गया। उनके लौटने में बहुत देर हो गई। इससे सबको बहुत चिंता हुई। जब वह अपने कार्यक्रम से दो दिन देर कर के वापस आए तो उनके कमांडिंग ऑफिसर ने उनसे इस देर का कारण पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया, 'हमें अपनी गश्त में उग्रवादी मिले ही नहीं तो हम आगे चलते ही चले गए, जब तक हमने उनका सामना नहीं कर लिया।' इसी तरह, जब इनकी बटालियन को सियाचिन में तैनात होना था, तब मनोज युवा अफसरों की एक ट्रेनिंग पर थे। वह इस बात से परेशान हो गये कि इस ट्रेनिंग की वजह से वह सियाचिन नहीं जा पाएँगे। जब इस टुकड़ी को कठिनाई भरे काम को अंजाम देने का मौका आया, तो मनोज ने अपने कमांडिंग अफसर को लिखा कि अगर उनकी टुकड़ी उत्तरी ग्लेशियर की ओर जा रही हो तो उन्हें 'बाना चौकी' दी जाए और अगर कूच सेंट्रल ग्लोशियर की ओर हो, तो उन्हें 'पहलवान चौकी' मिले। यह दोनों चौकियाँ दरअसल बहुत कठिन प्रकार की हिम्मत की माँग करतीं हैं और यही मनोज चाहते थे। आखिरकार मनोज कुमार पांडेय को लम्बे समय तक 19700 फीट ऊँची 'पहलवान चौकी' पर डटे रहने का मौका मिला, जहाँ इन्होंने पूरी हिम्मत और जोश के साथ काम किया।
ऑपरेशन विजय और वीरगति

पाकिस्तान के साथ कारगिल युद्ध के कठिन मोर्चों में एक मोर्चा खालूबार का था जिसको फ़तह करने के लिए कमर कस कर उन्होने अपनी 1/11 गोरखा राइफल्स की अगुवाई करते हुए दुश्मन से जूझ गए और जीत कर ही माने। हालांकि, इन कोशिशों में उन्हें अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी। वे 24 वर्ष की उम्र जी देश को अपनी वीरता और हिम्मत का उदाहरण दे गए।

फिल्म
कैप्टन मनोज के जीवन और उनकी वीरता को वर्ष 2003 में बनी एक फिल्म 'एल ओ सी कारगिल' में दर्शाया गया , जिसमें उनके किरदार को अजय देवगन ने अभिनीत किया।

सम्मान
कारगिल युद्ध में असाधारण बहादुरी के लिए उन्हें सेना का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र (मरणोपरांत) से अलंकृत किया गया। सारा देश उनकी बहादुरी को प्रणाम करता है।
 
आज परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की ४३ वीं जयंती के अवसर पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
 
जय हिन्द !!

जय हिन्द की सेना !!

रविवार, 3 जुलाई 2016

३ जुलाई - भारतीय सेना के दो महानायकों की पुण्यतिथि

आज ३ जुलाई है ... आज का दिन समर्पित है ... भारतीय सेना के दो महानायकों को ... यह दोनों महानायक आज भी हर सैनिक के लिए प्रेरणा बने हुये है | आज इन दोनों की ही पुण्यतिथि है |

पहले महानायक हैं ...

अमर शहीद ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान,महावीर चक्र विजेता (मरणोपरांत)
ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान (जन्म:15 जुलाई 1912 आज़मगढ़ – मृत्यु: 3 जुलाई 1948) भारतीय सेना के एक उच्च अधिकारी थे जो भारत और पाकिस्तान के प्रथम युद्ध (1947-48) में शहीद हो गये। उस्मान 'नौशेरा के शेर के' रूप में ज्यादा जाने जाते हैं। वह भारतीय सेना के सर्वाधिक प्रतिष्ठित और साहसी सैनिकों में से एक थे, जिन्होंने जम्मू में नौशेरा के समीप झांगर में मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण गंवा दिए थे। मरणोपरांत उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।  
 
आज नौशेरा के शेर - ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की ६८ वीं पुण्यतिथि पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
 
और दूसरे महानायक हैं ...
 
अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे,परमवीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) 
कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे, (२५/०६/१९७५ - ०३/०७/१९९९) भारतीय सेना की १/११ गोरखा राइफल्स के अधिकारी थे ... १९९९ के कारगिल युद्ध के दौरान उनके अदम्य साहस और वीरतापूर्ण रण कौशल के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था | यह सम्मान उन्हें मरणोपरांत पदान किया गया था |
आज परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की १७ वीं पुण्यतिथि के अवसर पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
 
जय हिन्द !!
 
जय हिन्द की सेना !!

शनिवार, 25 जून 2016

खालूबार का परमवीर - अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे

 
मनोज कुमार पांडेय (25 जून 1975, सीतापुर, उत्तर प्रदेश -- 3 जुलाई 1999, कश्मीर), भारतीय सेना के अधिकारी थे जिन्हें सन १९९९ मे मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा

पांडेय का जन्म 25 जून 1975 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के रुधा गाँव में हुआ था। उनके पिता गोपीचन्द्र पांडेय तथा माँ के नाम मोहिनी था। मनोज की शिक्षा सैनिक स्कूल लखनऊ में हुई और वहीं से उनमें अनुशासन भाव तथा देश प्रेम की भावना संचारित हुई जो उन्हें सम्मान के उत्कर्ष तक ले गई। इन्हें बचपन से ही वीरता तथा सद्चरित्र की कहानियाँ उनकी माँ सुनाया करती थीं और मनोज का हौसला बढ़ाती थीं कि वह हमेशा जीवन के किसी भी मोड पर चुनौतियों से घबराये नही और हमेश सम्मान तथा यश की परवाह करे। इंटरमेडियेट की पढ़ाई पूरी करने के बाद मनोज प्रतियोगिता में सफल होने के पश्चात पुणे के पास खडकवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में दाखिला लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के पश्चात वे 11 गोरखा रायफल्स रेजिमेंट की पहली वाहनी के अधिकारी बनें।

करियर

“जिस समय राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के च्वाइस वाले कालम जहाँ यह लिखना होता हैं कि वह जीवन में क्या बनना चाहते हैं क्या पाना चाहते हैं वहां सब लिख रहे थे कि, किसी को चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ बनना चाहता हैं तो कोई लिख रहा था कि उसे विदेशों में पोस्टिंग चाहिए आदि आदि, उस फार्म में देश के बहादुर बेटे ने लिखा था कि उसे केवल और केवल परमवीर चक्र चाहिए”
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षण के पश्चात वे बतौर एक कमीशंड ऑफिसर ग्यारहवां गोरखा राइफल्स की पहली बटालियन में तैनात हुये। उनकी तैनाती कश्मीर घाटी में हुई। एक बार मनोज को एक टुकड़ी लेकर गश्त के लिए भेजा गया। उनके लौटने में बहुत देर हो गई। इससे सबको बहुत चिंता हुई। जब वह अपने कार्यक्रम से दो दिन देर कर के वापस आए तो उनके कमांडिंग ऑफिसर ने उनसे इस देर का कारण पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया, 'हमें अपनी गश्त में उग्रवादी मिले ही नहीं तो हम आगे चलते ही चले गए, जब तक हमने उनका सामना नहीं कर लिया।' इसी तरह, जब इनकी बटालियन को सियाचिन में तैनात होना था, तब मनोज युवा अफसरों की एक ट्रेनिंग पर थे। वह इस बात से परेशान हो गये कि इस ट्रेनिंग की वजह से वह सियाचिन नहीं जा पाएँगे। जब इस टुकड़ी को कठिनाई भरे काम को अंजाम देने का मौका आया, तो मनोज ने अपने कमांडिंग अफसर को लिखा कि अगर उनकी टुकड़ी उत्तरी ग्लेशियर की ओर जा रही हो तो उन्हें 'बाना चौकी' दी जाए और अगर कूच सेंट्रल ग्लोशियर की ओर हो, तो उन्हें 'पहलवान चौकी' मिले। यह दोनों चौकियाँ दरअसल बहुत कठिन प्रकार की हिम्मत की माँग करतीं हैं और यही मनोज चाहते थे। आखिरकार मनोज कुमार पांडेय को लम्बे समय तक 19700 फीट ऊँची 'पहलवान चौकी' पर डटे रहने का मौका मिला, जहाँ इन्होंने पूरी हिम्मत और जोश के साथ काम किया।
 
ऑपरेशन विजय और वीरगति

पाकिस्तान के साथ कारगिल युद्ध के कठिन मोर्चों में एक मोर्चा खालूबार का था जिसको फ़तह करने के लिए कमर कस कर उन्होने अपनी 1/11 गोरखा राइफल्स की अगुवाई करते हुए दुश्मन से जूझ गए और जीत कर ही माने। हालांकि, इन कोशिशों में उन्हें अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी। वे 24 वर्ष की उम्र जी देश को अपनी वीरता और हिम्मत का उदाहरण दे गए।

फिल्म
 
कैप्टन मनोज के जीवन और उनकी वीरता को वर्ष 2003 में बनी एक फिल्म 'एल ओ सी कारगिल' में दर्शाया गया , जिसमें उनके किरदार को अजय देवगन ने अभिनीत किया।

सम्मान
 
कारगिल युद्ध में असाधारण बहादुरी के लिए उन्हें सेना का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र (मरणोपरांत) से अलंकृत किया गया। सारा देश उनकी बहादुरी को प्रणाम करता है।
 
 
आज परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की ४१ वीं जयंती के अवसर पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
 
जय हिन्द !!

जय हिन्द की सेना !!

शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

नौशेरा का शेर और खालूबार का परमवीर

आज ३ जुलाई है ... आज का दिन समर्पित है ... भारतीय सेना के दो महानायकों को ... यह दोनों महानायक आज भी हर सैनिक के लिए प्रेरणा बने हुये है | आज इन दोनों की ही पुण्यतिथि है |

पहले महानायक हैं ...

अमर शहीद ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान,महावीर चक्र विजेता (मरणोपरांत)
ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान (जन्म:15 जुलाई 1912 आज़मगढ़ – मृत्यु: 3 जुलाई 1948) भारतीय सेना के एक उच्च अधिकारी थे जो भारत और पाकिस्तान के प्रथम युद्ध (1947-48) में शहीद हो गये। उस्मान 'नौशेरा के शेर के' रूप में ज्यादा जाने जाते हैं। वह भारतीय सेना के सर्वाधिक प्रतिष्ठित और साहसी सैनिकों में से एक थे, जिन्होंने जम्मू में नौशेरा के समीप झांगर में मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण गंवा दिए थे। मरणोपरांत उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।  
 
आज नौशेरा के शेर - ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की ६७ वीं पुण्यतिथि पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
 
और दूसरे महानायक हैं ...
 
अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे,परमवीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) 
कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे, (२५/०६/१९७५ - ०३/०७/१९९९) भारतीय सेना की १/११ गोरखा राइफल्स के अधिकारी थे ... १९९९ के कारगिल युद्ध के दौरान उनके अदम्य साहस और वीरतापूर्ण रण कौशल के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था | यह सम्मान उन्हें मरणोपरांत पदान किया गया था |

आज परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की १६ वीं पुण्यतिथि के अवसर पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
 
जय हिन्द !!
 
जय हिन्द की सेना !!

गुरुवार, 25 जून 2015

परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की ४० वीं जयंती

अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे,परमवीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) 
कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे, (२५/०६/१९७५ - ०३/०७/१९९९) भारतीय सेना की १/११ गोरखा राइफल्स के अधिकारी थे ... १९९९ के कारगिल युद्ध के दौरान उनके अदम्य साहस और वीरतापूर्ण रण कौशल के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था | यह सम्मान उन्हें मरणोपरांत पदान किया गया था |

आज परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की ४० वीं जयंती के अवसर पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |
जय हिन्द !!

जय हिन्द की सेना !!

बुधवार, 25 जून 2014

परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की ३९ वीं जयंती

अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे,परमवीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) 
कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे, (२५/०६/१९७५ - ०३/०७/१९९९) भारतीय सेना की १/११ गोरखा राइफल्स के अधिकारी थे ... १९९९ के कारगिल युद्ध के दौरान उनके अदम्य साहस और वीरतापूर्ण रण कौशल के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था | यह सम्मान उन्हें मरणोपरांत पदान किया गया था |

आज परमवीर अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे की ३९ वीं जयंती के अवसर पर हम सब उनको शत शत नमन करते है |

जय हिन्द !!

जय हिन्द की सेना !!

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