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रविवार, 23 अगस्त 2009

सवा लाख को चढ़ गया न जाने कैसा खून ??


आज से ठीक दिन पहेले की एक पोस्ट में आप सब को दिल्ली का लाल खून का काला धंधा
के विषय में बताया था लीजिये साहब लखनऊ की ख़बर भी पेश--खिदमत है |

सवा लाख मरीजों को जाने कैसे-कैसे लोगों का खून चढ़ा दिया गया होगा। यह सवाल खड़ा हो गया है शनिवार को लखनऊ में खून का अवैध कारोबार करने वाले गिरोह के पर्दाफाश के साथ। पुलिस 14 धंधेबाजों वाले इस गिरोह के छह सदस्यों को ही दबोच पाई है। भारी मात्रा में खून, प्लाज्मा, सीरम पाउच, चिकित्सा विश्वविद्यालय के पैड मोहरें बरामद की गई हैं। सरगना सहित आठ लोग अब भी पकड़ से बाहर है। पकड़े गए लोगों ने बताया है कि गिरोह अब तक करीब सवा लाख मरीजों को खून बेच चुका है। खून पेशेवर और गरीबों से खरीदा जाता था।

चिकित्सा विश्वविद्यालय व शहर के अन्य अस्पतालों में खून के अवैध कारोबार होने की जानकारी पाकर पुलिस की टीमें सक्रिय हुई। सीओ चौक विनय चंद्रा की टीम ने बालागंज चौराहे के पास तीन लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार लोगों ने अपना नाम बस्ती निवासी दीपक उर्फ अमित कुमार पांडे, उन्नाव के हसनगंज निवासी आलोक कुमार द्विवेदी उर्फ चिंटू और इंदिरानगर के रवींद्र पल्ली निवासी अमरेश सिंह उर्फ मुन्ना बताया। दीपक ठाकुरगंज और आलोक इंदिरानगर की बसंत विहार कालोनी में रहता है।

पुलिस ने आलोक के घर से बैग में भरे खून के पाउच बरामद किए। जबकि दीपक के घर से सीतापुर के अल्लीपुर निवासी धर्मेद्र सिंह, मदेयगंज निवासी मयंक द्विवेदी और मृदुल द्विवेदी को गिरफ्तार कर लिया। इनके कब्जे से खून के 35 पाउच, प्लाज्मा के 36 पाउच, लेबल, चिविवि के फर्जी सार्टिफिकेट व अन्य चीजें बरामद की। एसपी पश्चिमी परेश पांडेय ने बताया कि गैंग का सरगना जितेंद्र सिंह रवींद्र पल्ली स्थित अपने घर पर रक्त इकट्ठा करता था। उसने चाचा अमरेश सिंह व भाई धर्मेन्द्र सिंह के साथ धंधा शुरू किया। गैंग के सदस्य आलोक द्विवेदी के पिता यदुनाथ द्विवेदी चिकित्सा विश्वविद्यालय के पूर्व लैब तकनीशियन हैं। लिहाजा इस संस्थान के नाम वाले रैपर, पाउच का लेबल व सार्टिफिकेट वह बनवाता था। यह गरीबों व पेशेवर रक्तदाताओं से खून निकाल कर उसे फ्रिज में रख लेते थे। बाद में ब्लड बैंक से कम दाम में उसे बेच दिया जाता था। उन्होंने बताया चिकित्सा विश्वविद्यालय के अलावा कई अस्पतालों व नर्सिग होम में इन लोगों का धंधा पिछले तीन सालों से चल रहा था। गैंग के सदस्यों ने अब तक करीब सवा लाख मरीजों को खून बेचने की बात स्वीकारी है।

सीएमओ डा. एके शुक्ल ने बताया कि बरामद खून को जांच के लिए पीजीआई भेजा गया है। इसके अलावा चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित कर दी है।

एसे में अपने एक ब्लॉगर मित्र और मशहूर हास्य कवि अलबेला खत्री जी की चंद पंक्तिया यहाँ पेश कर रहा हूँ :-

दूध है जो महंगा तो

पीयो ख़ूब सस्ता है

आदमी के ख़ून का गिलास मेरे देश में ........



1 टिप्पणी:

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