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सोमवार, 3 अगस्त 2009

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री का सपना 'किसान उत्सव'

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री ने सभी गांवों में किसान उत्सव मनाने के बहाने जैसा सब्जबाग दिखाया वह दूर की कौड़ी ही नजर आता है। उत्तर प्रदेश में कृषि और किसानों की जैसी स्थिति है उसे देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि राज्य सरकार किसान उत्सव मनाने और इस बहाने किसानों की समस्याएं दूर करने के प्रति वास्तव में प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार कुछ भी दावा क्यों न करे, लेकिन पिछले दो वर्षों में हर स्तर पर किसान जिस प्रकार की समस्याओं का सामना कर रहे हैं उससे तनिक भी यह संकेत नहीं मिलता कि कृषि और किसानों का उत्थान उसकी प्राथमिकता सूची में शामिल है। बात चाहे उर्वरकों की किल्लत की हो अथवा आलू-गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान न होने की-राज्य सरकार अथवा उसके कृषि विभाग की ओर से ऐसा कुछ होता हुआ नजर नहीं आता जो किसानों को यह आश्वासन दे सके कि उनकी समस्याओं की सुधि ली जा रही है।

ऐसा लगता है कि कृषि मंत्री किसानों की जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं अथवा वह कृषि विभाग की कार्यप्रणाली से अवगत नहीं। यदि ऐसा नहीं होता तो वह इसकी परिकल्पना नहीं करते कि तहसीलदार किसानों के खसरा-खतौनी दुरुस्त करें, पशु डाक्टर उनके द्वार पर पशुओं की जांच करके दवाएं दें, बीज, खाद और दवाएं छिड़कने के लिए पैसे की जरूरत सहकारिता विभाग के अधिकारी और बैंक पूरी कर दें अथवा कृषि वैज्ञानिक उन्हें खेती की नई तकनीकें बताएं। बेहतर हो कि कृषि मंत्री यह महसूस करें कि राज्य के किसानों को उत्सव की नहीं, सामान्य सुविधाओं की जरूरत है। यदि किसानों को बीज, बिजली और खाद उपलब्ध हो सके तथा उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके तो यही उनकी सबसे बड़ी सेवा होगी।

एक ऐसे समय जब उत्तर प्रदेश सूखे की मार झेल रहा है तब यह जरूरी है कि कृषि मंत्री किसानों को सब्जबाग दिखाने के स्थान पर उन्हें तात्कालिक राहत प्रदान करने की किसी योजना को सामने लाएं। यदि कृषि विभाग के स्तर पर ऐसा कुछ नहीं किया जाता है तो यह लगभग तय है कि पहले से बदहाली के शिकार किसानों की समस्याएं सूखे के संकट के कारण और अधिक बढेंगी।

1 टिप्पणी:

  1. आपका चिन्ता जायज है,
    परन्तु मन्त्रियों को इससे क्या लेना-देना।

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