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शुक्रवार, 17 जुलाई 2009

कामकाज में पारदर्शिता

सरकारी तंत्र कैसे काम करता है, यह किसी से छिपा नहीं है। किसी विभाग से कोई जानकारी मांग कर देख लीजिए। समय का अभाव बताकर किसी और दिन आने के लिए कह दिया जाएगा। यदि कोई अपनी समस्या बताते हुए अड़ जाए तो उसे किसी न किसी तरीके से प्रताड़ित किया जाएगा। रिकार्ड बहुत पुराना है, कभी फार्म समाप्त हैं या साहब नहीं हैं। इसमें कोई दिलचस्पी नहीं लेता। सरकारी विभागों में काम कैसे निकलवाया जाता है इसके सरल तरीके से सभी परिचित हैं। जो इस तरीके को नहीं अपनाते, उन्हें अपने काम के लिए चक्कर काटने पड़ेंगे ही। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता की बात तभी मानी जाएगी जब आम जन द्वारा मांगी गई जानकारी उसे समय पर मुहैया करवा दी जाए। अधिकारियों को जवाबदेह बनाया गया है कि वे लोगों द्वारा मांगी गई सूचना समय पर उपलब्ध कराएं। सरकार ने ब्लाक और पंचायत स्तर पर भी सूचना देने की व्यवस्था कर दी है। इसके बावजूद अधिसंख्य लोगों को इस अधिकार की उपयोगिता की जानकारी नहीं है। कई मामले सामने आए हैं जिनमें आम जन को समय पर और पूरी सूचना उपलब्ध नहीं करवाई गई। जनता को अब विभागीय अधिकारियों के नखरों से छुटकारा मिलने वाला है। प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर ही सूचना अधिकार के यानी आरटीआई काउंटर खुलने वाले है। आरटीआई के तहत आवेदन करने वालों को संबंधित सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

इन काउंटरों के खुलने से एक ही छत के नीचे सभी प्रकार की सूचनाएं मिलने लगेंगी। इन काउंटरों पर आने वालों को गुमराह नहीं किया जा सकेगा। लोगों के आवेदन की जांच पड़ताल करने के बाद विशेष सेल उसे संबंधित विभागों के पास जानकारी मुहैया करवाने के लिए भेजे देगा। देखा जाए तो इस अधिकार की उपयोगिता तभी साबित होगी जब लोगों को इसका इस्तेमाल करने के बाद यह न कहना पड़े कि सूचना अधूरी है। तभी इस कानून को लागू करने का उद्देश्य पूरा हो पाएगा। इसमें दो राय नहीं कि सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करने वाले लोगों में जागरूकता आई है। इसे उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जितनी सरल होगी, उसके उतने ही कारगर परिणाम निकलेंगे।

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