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गुरुवार, 3 सितंबर 2009

मेरे दिल की बात

जो मरे कोई "नेता" तो रोते है हजारो,
झुकते है "झंडे" और "सिर" भी |



होती कोई आँख नम,
पड़ता फर्क किसी को,



जवान बेटे , भाई होते शहीद ,
जब जब गिरते 'मिग' मेरे देश में ..... |



रोता है दिल ,रोता हूँ मैं भी ....
क्यों है "शहादत" के यह हाल मेरे देश में ...??



घर घर शहीद की बेवा,
क्यों मांजती है थाल मेरे देश में .....??



नहीं है कोई बैर नेताओ से मुझ को,
मैं कहेता कि "जाए" कोई भी 'एसे',



रहेगा "गणतंत्र" तो रहेगे नेता भी,
है दुनिया का सब से बड़ा प्रजातंत्र मेरे देश में ...|



बस चाहता हूँ इतना .....,
कि मिले शहीदों को मान मेरे देश में ....||






फ़िर कहेता हूँ यारो याद रखना ......

बस इतना याद रहे ....एक साथी और भी था ||

7 टिप्‍पणियां:

  1. जो मरे कोई "नेता" तो रोते है हजारो,
    झुकते है "झंडे" और "सिर" भी |
    न होती कोई आँख नम,
    न पड़ता फर्क किसी को,
    बहुत खुब लिखा आप ने जब नेता मरता है तो कोई नही रोता, बस दिखावा ही होता है, ओर लोग दबी जबान से कहते है मर गया साला कमीना....
    ओर जब कोई जवान मरता है तो हर इंसान अंदर तक हिल जाता है हर आंख मै आंसू होते है, हर दिल रोता है.
    सलाम है आप की कविता को, आप की कलम को.
    बहुत सुंदर लिखा
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूबसूरत ख्याल है और हम भी यही चाहते हैं सुन्दर रचना के लिये बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. Bilkul sahi kaha....Aapke man ke ye bhaav jan jan ke man ke bhaav hain.

    उत्तर देंहटाएं
  4. ख़ूब कही...........
    बहुत ख़ूब कही..........
    बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  5. "बस चाहता हूँ इतना .....,
    कि मिले शहीदों को मान मेरे देश में ....||"

    बहुत उत्तम भाव।
    बधाई!

    उत्तर देंहटाएं

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