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गुरुवार, 10 सितंबर 2009

विजेंदर ने रचा इतिहास


भारतीय मुक्केबाजी के 'गोल्डन ब्वाय' विजेंदर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रचते हुए विश्व चैंपियनशिप में देश का पहला पदक तय तब कर दिया जब वह इटली के मिलान में चल रहे टूर्नामेंट के मिडिलवेट वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंच गए।
दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी और शीर्ष वरीयता प्राप्त विजेंदर ने उक्रेन के सर्गेई देरेवियांचेंको को 12-4 से हराया। वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के अंतिम चार में पहुंचने वाले पहले भारतीय बन गए। विजेंदर ने जीत के बाद कहा, 'मैं सातवें आसमान पर हूं। मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता। मैंने भारत के लिए एक और मिथक तोड़ा है। मैं बहुत खुश हूं।' ओलंपिक कांस्य पदक विजेता विजेंदर का सामना अब पूर्व लाइट हैवीवेट विश्व चैंपियन अब्बोस अतोएव से होगा जो इसी साल मिडिलवेट वर्ग में लौटे हैं।
विजेंदर ने उजबेकिस्तान के इस मुक्केबाज को जून में चीन में हुई एशियाई चैंपियनशिप में हराया है। उन्होंने कहा, 'मेरा हमेशा से मानना रहा है कि हमें विरोधी से डरना नहीं चाहिए। इससे प्रदर्शन पर असर पड़ता है। मैं पिछले रिकार्ड के बारे में नहीं सोच रहा। आखिरकार 11 मिनट में मेरा प्रदर्शन ही तो मायने रखेगा।' खेल रत्न पुरस्कार प्राप्त इस मुक्केबाज ने कहा कि पहले ही दौर में उसने अपने विरोधी को आंक लिया था। पहला दौर 1-1 से बराबरी पर रहा।
छह फुट लंबे विजेंदर को कद का भी फायदा मिला। उन्होंने दूसरे दौर में 5-3 की बढ़त बना ली। आखिरी दौर में उसने काफी आक्रामकता दिखाई और अपने विरोधी को हावी नहीं होने दिया। उन्होंने यह दौर 6-0 से जीता। विजेंदर ने कहा, 'मैंने इस मुक्केबाज को पहले कभी नहीं देखा था। मुझे बताया गया था कि वह अच्छा मुक्केबाज है लिहाजा मैंने पहले दौर में उसे आजमाया। एक बार उसकी तकनीक का पता चलने पर मैंने अपने कद का फायदा उठाते हुए खेला।'
राष्ट्रीय कोच गुरुबख्श सिंह संधू ने हरियाणा के इस मुक्केबाज की तारीफ करते हुए कहा, 'विजेंदर कभी भी अपना आपा नहीं खोता और निर्णायक वक्त में भी नियंत्रित रहता है।' 
मैनपुरी के सभी खेल प्रेमियों की ओर से विजेंदर को आगे आने वाले मुकाबलों के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं |

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