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गुरुवार, 24 सितंबर 2009

रमेश के कांसे ने विश्व कुश्ती में रचा इतिहास - 42 साल बाद भारत को पहला पदक दिलाया



भारतीय पहलवान रमेश कुमार ने डेनमार्क के हेरनिंग में चल रही विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के 74 किलो फ्री स्टाइल वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। बीजिंग ओलंपिक में सुशील कुमार के कांस्य पदक के बाद कुश्ती में किसी बड़ी प्रतियोगिता में भारत का यह पहला पदक है।
हरियाणा के सोनीपत के पास छोटे से गांव पुरखास के इस पहलवान ने वह कर दिखाया जो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार यहां नहीं कर सके। उन्होंने इस प्रतिष्ठित स्पर्धा में 42 साल बाद भारत को पहला पदक दिलाया। विश्व कुश्ती के इतिहास में भारत का यह केवल चौथा पदक है। इससे पहले 1967 में नई दिल्ली में हुई प्रतियोगिता में विशंबर ने रजत और 1961 में जापान में आयोजित प्रतियोगिता में उदय चंद ने कांस्य और महिला वर्ग में अलका तोमर में 2006 में चीन में कांस्य पदक जीता था।
रमेश ने मोलडोवा के अलेक्जेंडर बर्का को तकनीकी अंकों के आधार पर हराया। रेपेचेज राउंड के बाद स्कोर 7-7 से बराबर था। रमेश ने निराशाजनक शुरुआत की और 0-3 से पिछड़ गए। दूसरे सत्र में शानदार वापसी करते हुए उसने दो अंक बनाए और आखिरी सत्र में पांच अंक लेकर जीत दर्ज की। इससे पहले रमेश ने अमेरिका के डस्टिन श्लाटेर को 3-2 से हराया था। ब्रिटेन के माइकल ग्रंडी को 4-2 और बुल्गारिया के किरिल तेर्जिव को 7-4 से हराकर वह सेमीफाइनल में पहुंचे थे।
पिछले नौ साल से उत्तर रेलवे में कार्यरत रमेश के कोच और कुश्ती के सरकारी पर्यवेक्षक नरेश कुमार ने बताया कि एक ही दिन में फाइनल तक के मुकाबले होने से हमारे पहलवानों को नुकसान उठाना पड़ा है और यही मुकाबला पहले की तरह दो या दिन तक चलता तो रमेश के रजत या स्वर्ण जीतने के ज्यादा मौके होते। नरेश ने कहा कि हम इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कुश्ती महासंघ तक ले जाएंगे क्योंकि एक वजन वर्ग के फाइनल तक के मुकाबले एक ही दिन होने से पहलवानों को विश्राम या अपनी रणनीति तय करने का मौका नहीं मिल पाता है। यही मुकाबला अगर मुक्केबाजी की तरह दो या तक चले तो हमारे पहलवानों को ज्यादा लाभ हो सकता है।
सेमीफाइनल में अजरबैजान के चामसुलवारा सी के हाथों 0-5 से हारकर हालांकि वह स्वर्ण पदक की दौड़ से बाहर हो गए। इस वर्ग में स्वर्ण पदक रूस के डेनिस टी ने जीता। इससे पहले ओलंपिक कांस्य पदक विजेता सुशील कुमार वह कारनामा करने से चूक गए जो विश्व मुक्केबाजी में विजेंदर सिंह ने कर दिखाया। सुशील को 66 किलो फ्रीस्टाइल के कांस्य पदक प्ले आफ मैच में पराजय का सामना करना पड़ा।

मैनपुरी के सभी खेल प्रेमियों की ओर से पहलवान रमेश कुमार को 'इतिहास' रचने की बहुत बहुत बधाई |

3 टिप्‍पणियां:

  1. बधाई हो बधाई हमारे सारे भारतीय समाज की तरफ़ से

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  2. हमारी ओर से भी पहलवान रमेश कुमार को
    'इतिहास' रचने की बहुत बहुत बधाई |

    उत्तर देंहटाएं

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