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रविवार, 20 जून 2010

कार्तिक बड़ा प्यारा, पापा का दुलारा !





आज सुबह की पोस्ट मैंने एक पुत्र की हैसियत से लिखी थी और मेरी यह पोस्ट एक पिता की हैसियत से है ........आशा है आप सब को पसंद आएगी !

मेरा एक बेटा है, कार्तिक, साल का है .........पर है बहुत शैतान ! पूरा घर सारा का सारा दिन उसकी मस्ती से गूंजता रहता है | हम सब की .........खास कर मेरी........जान है वह ! यह पोस्ट मेरी ओर से मेरे पुत्र को एक छोटी सी गिफ्ट आज के इस ख़ास दिन की ! I LOVE YOU,SON !

खुशदीप भाई की आज की पोस्ट पढ़ी तब इस पोस्ट को लिखने का विचार आया | उनकी पोस्ट पर मैंने टिपण्णी दी ,
शिवम् मिश्रा said... खुशदीप भाई, यहाँ मैं आपसे थोड़ी अलग सोच रखता हूँ..................अगर ज़िन्दगी में कभी ऐसा मौका आ पड़े तो पिता भी लोरी दे सकता है !

आप को पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाऎँ !!


सो पेश है मेरी मनपसंद लोरी जो एक पिता गा रहा है अपने बच्चे के लिए !





आप सब को पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाऎँ !!

4 टिप्‍पणियां:

  1. मिश्रा जी ये बात सच है की माँ की जगह कोई नहीं ले सकता. प्रकृति ने स्त्री को शिशु के लालन पालन के लिए स्वाभाविक रूप से तैयार किया है पर जरुरत पड़ने पर एक पिता भी बच्चो को पाल सकता है, लोरी सुना कर सुला सकता है हाँ इसके लिए उसे एक स्त्री से ज्यादा प्रयास करने पड़ते हैं. मैंने भी कई बार अपने दोनों बच्चों को लोरी सुनकर सुलाया है. मिश्रा जी मेरे पुत्र का नाम भी कार्तिक है. अच्छा अब ये बताएं आपका कार्तिक मेरे कार्तिक से सुन्दर कैसे? क्या वो भी अपनी माँ पर गया है? ( हा हा हा ....... मजाक था भाई)

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  2. माँ की ममता से पिता का मुकाबला शायद कोई भी न करना चाहे ! मगर प्यार पिता का कम नहीं होता ! बढ़िया ...अपने बच्चों की याद भी दिला दी !

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  3. यह विडियो बहुत अच्छा लगा.... मुझे भी आज अपने मम्मी-पापा दोनों याद आ रहे हैं.....

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  4. दोनो अपनी अपनी जगह ठीक है, मां मै पिता जितनी क्ठोरता नही आ सकती, वर्ना वो मां नही होगी, ओर पिता मै मां जेसी मुलायमता नही आ सकती, क्योकि पिता बच्चे को जमाने से लडना सीखाता है, शान से जीना सीखाता है, ओर मां बच्चे मै संस्कार डालती है उसे प्यार करना सीखाती है, जब कि पिता बच्चे से ज्यादा प्यार करता है, लेकिन उसे कहता नही, ओर मां बार बार अपना प्यार जताती है, क्योकि वो मां है

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