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शनिवार, 6 जून 2009

जूते की अभिलाषा

चाह नहीं मैं नेता मंत्री के
ऊपर फेंका जाऊँ,
चाह नहीं प्रेस कान्फ्रेंस में
किसी पत्रकार को ललचाऊँ,
चाह नहीं, किसी समस्या के लिए
हे हरि, किसी के काम आऊँ
चाह नहीं, मजनूं के सिर पर,
किसी लैला से वारा जाऊँ!
मुझे पहन कर वनमाली!
उस पथ चल देना तुम,
संसद पथ पर देस लूटने
जिस पथ जावें वीर अनेक।
(श्रद्धेय माखनलाल चतुर्वेदी की आत्मा से क्षमायाचना सहित,)
(चित्र – साभार : सीएवीएस संचार)

2 टिप्‍पणियां:

  1. ये जूतियां अर्स दे चुमियाँ...ये पंजाबी कहावत एक हिस्सा है.बरसों पहले लिखी ये कहावत आज सच साबित हो रही है.मुन्तजिर अली जेदी के जुते को देख कर तो अब यही लगने लगा है.

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  2. kuch dino bad juta khride jane par bhi likh kar dena pada karega ki jute ka use kis liye hoga.kabhi hamare blog par bhi dastak de.

    उत्तर देंहटाएं

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