




ठीक पच्चीस साल पहले एक आग को बुझाने के लिए दवानल फैला दिया गया और वह दवानल हजारो निर्दोषों और दोषियों को निगल गया । उसमे एक थी श्रीमती इंदिरा गाँधी भी ।
हाँ मैं बात कर रहा हूँ ओपरेशन ब्लू स्टार की । जो एक बहुत बड़ी राजनितिक भूल साबित हुआ था । सेना को पवित्र स्वर्ण मन्दिर में मय टैंको के घुसा दिया गया एक भिंडरावाले को मारने के लिए जिसे ताकत राजनीतिज्ञों ने दी अपने विरोधियों को नीचा दिखने के लिए ।
भिंडरावाले को संत कहा जाने लगा तमाम नेता ,धार्मिक गुरु ,पत्रकार उसके दरवार में हाजिरी लगाने लगे । खालिस्तान की मांग चरम पर पहुच गई । शांत पंजाब आतंक की आग में धधकने लगा । हजारो निर्दोष मारे गए । जख्म आज भी नही भरे है पच्चीस साल बाद भी
एक चौथाई शताब्दी बीत गई लेकिन सबक आज भी नही लिया दुनिया ने , आज भी लादेन जैसे पैदा कर दिए जाते है फ़िर ओपरेशन चलाये जाते है और कौमों को कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है ।
आइये पच्चीस साल बाद उन बेबकूफियों पर आसूं बहाए जो पच्चीस साल पहेले की गई और आज भी की जा रही है । जिसकी आग में इंदिरा गाँधी ,जनरल वैद्द्य जैसे कई लोग, जिनकी देश को जरूरत थी, भी जल कर ख़ाक हो गए ।
नीला तारा की विवेचना होनी चाहिए सरकारी श्वेत पत्र के आलावा|
बिलकुल ठीक,सहमत हूँ आपसे ।
जवाब देंहटाएंshaandaar lekh
जवाब देंहटाएंधन्यवाद याद दिलाने के लिए
जवाब देंहटाएंऐसे पलों को भूलना अब ज़रूरी है ...
जवाब देंहटाएं27 साल बाद इतिहास दुहराया जा रहा है!
जवाब देंहटाएंआपकी यह पोस्ट आज के (०६ जून, २०१३) ब्लॉग बुलेटिन - ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई
जवाब देंहटाएंराजनीति में ऐसे मंज़र बारबार देखने को मिलते हैं
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