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गुरुवार, 30 सितंबर 2010

मेरा दिल = खुदा का घर

एक शेर याद आया है पर किस का है यह याद नहीं  ... आज के मौके पर आप सब की नज़र है !!

बुत बना रखें है ...नमाज़ भी अदा होती है  ;
दिल मेरा दिल नहीं ...खुदा का घर लगता है !!

12 टिप्‍पणियां:

  1. वाह …………क्या खूब कहा है।

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  2. बड़ा प्रेरक और भावनात्मक शेर लिखा है आपने ....
    पढ़कर अच्छा लगा और ख़ुशी भी हुई .

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  3. बहुत बढ़िया सामयिक शेर ...वाह

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  4. दिल है कदमो पर किसी के सर झुका हो या न हो
    बंदगी तो अपनी फितरत है, खुदा हो या न हो !!

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  5. बढ़िया प्रस्तुति .......
    अच्छी पंक्तिया लिखी है ........

    इसे पढ़े और अपने विचार दे :-
    क्यों बना रहे है नकली लोग समाज को फ्रोड ?.

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  6. बच्चा बोला देखकर,मस्जिद आलीशान,
    एक अकेले ख़ुदा को,इतना बड़ा मकान!
    - निदा फ़ाज़ली

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  7. भले विचार आपकी भली बातें,
    होती रहेंगी अब तो मुलाकातें।

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  8. इन सभी धर्म के ठेकेदारों को खदेड़कर
    निर्धनों के लिए एक चिकित्सालय बनवाना चाहिए था!

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आपकी टिप्पणियों की मुझे प्रतीक्षा रहती है,आप अपना अमूल्य समय मेरे लिए निकालते हैं। इसके लिए कृतज्ञता एवं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

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