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Tuesday, August 16, 2011

अब और क्या कहें ...




अब और क्या कहें ...

4 comments:

  1. कुछ नहीं.. इसे तो बस विडम्बना कहें!!

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  2. kahe nahi ab to kuchh karane ki bari hai

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  3. भारत के लिए सुभाष जी आज भी जिन्दा है ,भारतीय जनता को यही विस्वास है वे प्रत्येक भारतीय के रग-रग में समाये हुए है.

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