अब और क्या कहें ...
पूरे दिन में हमारे साथ जो जो होता है उसका ही एक लेखा जोखा " बुरा भला " के नाम से आप सब के सामने लाने का प्रयास किया है | यह जरूरी नहीं जो हमारे साथ होता है वह सब " बुरा " हो, साथ साथ यह भी एक परम सत्य है कि सब " भला " भी नहीं होता | इस ब्लॉग में हमारी कोशिश यह होगी कि दिन भर के घटनाक्रम में से हम " बुरा " और " भला " छांट कर यहाँ पेश करे |
Tuesday, August 16, 2011
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कुछ नहीं.. इसे तो बस विडम्बना कहें!!
ReplyDeletekahe nahi ab to kuchh karane ki bari hai
ReplyDeleteसुन्दरगीत।
ReplyDeleteभारत के लिए सुभाष जी आज भी जिन्दा है ,भारतीय जनता को यही विस्वास है वे प्रत्येक भारतीय के रग-रग में समाये हुए है.
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