सदस्य

नयी पोस्ट की जानकारी लें ईमेल से

 

Tuesday, August 2, 2011

वो अन्ना तो पागल है ...

आज फेसबुक देखे ... साला सब शेर शेर कर के डरा रहा है हम को ...
तो लो भईया ... एक हम भी सुनते है ... शेर नहीं है ... अब इतनी महगाई में शेर कहाँ से लायें ... हम तो भईया सिर्फ़ अपने दिल की सुनते है और अपने शहर का हाल कुछ यूँ बताते है ...

तो जनाब अर्ज़ किया है कि ...
यहाँ खुदा ... वहाँ खुदा ... कहाँ कहाँ नहीं खुदा ... 

और जहाँ नहीं खुदा वहाँ कल खुदा होगा ...
 
क्यों कि मैनपुरी में सीवर लाइन का कार्य प्रगति पर है ... 

जनता परेशान ... मिडिया चुप और अधिकारी ... दिन ओ रात तरक्की पर है ... 

स्विस बैंक की जरुरत नहीं इनको ... आईसीआईसीआई से काम चलता है ... 

५ बोरी सीमेंट में ५० बोरी बालू ... अरे बाबूजी इतना तो चलता है ... 

'भारत निर्माण ' में यह लोग भी अपना योगदान लगा रहे है ... 

जहाँ कहीं से भी आवाज़ उठे ... 

हाल उसको दबा रहे है ... 

वो अन्ना तो पागल है जो फिर अनशन पर बैठेगा ... 

नगर पालिका के आगे देखो गांधी खुद कैद में दिखेगा ... 

- शिवम् मिश्रा 

( मैनपुरी नगर पालिका के आगे गाँधी की मूर्ति आजकल एक कांच के पिंजरे में है ... फिलहाल फोटो नहीं थी ... पर जल्द ही आपको फोटो भी दिखाऊंगा ... अभी तो जो मन में आया उसको लिख डाला  )

12 comments:

  1. कविता तो जबरदस्त बनी है....
    क्या भयंकर तुकबन्दी लगाई है भाई....

    वैसे मायावती के राज में गांधी जी को शीस महल मिल गया.... चित्र जल्दी लगाईए....

    ReplyDelete
  2. बढिया व्यंग्य है।

    ReplyDelete
  3. हा हा हा जोरदार कविता मारे।

    मस्त है।

    ReplyDelete
  4. ओह्ह !!! बहुत जोर से कविता आ रही थी लगता है.... एकदम से भरभरा के गुबार बाहर निकला है... लिखिए लिखिए खूब लिखिए....फोटुआ भी दिखाईएगा,...

    ReplyDelete
  5. सारी 'खुदाई' एक तरफ और मैनपुरी वाले हमारे भाई एक तरफ!!

    ReplyDelete
  6. सब कुछ खोद डाला है

    अब बारिश को भी रोकिए

    चाहे खुदा को ही कुरेदिए

    ReplyDelete
  7. ब्लॉग के रंगों में रंगी, कविता की तरंग।

    ReplyDelete
  8. हमारे यहाँ भी यही बुरा हाल है हर तरफ खुदा है और बस उसकी खुदाई है |

    ReplyDelete
  9. व्यंग्य मस्त है,
    अंदाज़ अलमस्त है,
    बीच में आ गए बेचारे अण्णा
    हर कोई वेबश है और अनमना
    कविता अच्छी है
    और सच्ची है !

    ReplyDelete
  10. बहुत ही बढ़िया, ज़बरदस्त और शानदार तरीके से व्यंग्य किया है आपने! लाजवाब प्रस्तुती!

    ReplyDelete
  11. जे बात इसे कहते हैं धोबी पछाड ..सीधी नीचे से हाथ दे के उठा के पटक देना ...इसमें हमको तो खूब भला लगा आप जिसको जुतियाए हैं उनको बुरा लगा होगा ...भला-बुरा

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणियों की मुझे प्रतीक्षा रहती है,आप अपना अमूल्य समय मेरे लिए निकालते हैं। इसके लिए कृतज्ञता एवं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

Blog Archive

Twitter