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शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

पुण्य तिथि पर विशेष : - आजाद हिंद फौज के आधार स्तम्भ थे रास बिहारी बोस

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी रास बिहारी बोस आजाद हिंद फौज का आधार स्तम्भ थे जिन्होंने जापान में रहकर अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया।

पच्चीस मई 1886 को बंगाल के ब‌र्द्धवान में जन्मे रास बिहारी बोस ने भारत में रहकर जहां बहुत सी क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया, वहीं उन्होंने जापान से ब्रितानिया हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष की शुरूआत की।
इतिहासवेत्ता एमके कपूर के अनुसार 1908 में अलीपुर बम कांड के बाद रास बिहारी बोस देहरादून आ गए और वन अनुसंधान संस्थान में हैड क्लर्क के रूप में काम करने लगे। वह वहां गुप्त रूप से स्वतंत्रता संग्राम की चिनगारी सुलगाने का काम करने लगे और बहुत से नौजवानों को आजादी के आंदोलन में शामिल कर लिया।

रास बिहारी बोस ने 1912 में दिल्ली के चांदनी चौक पर अंग्रेजों को खुली चुनौती दी और कहा कि जितना जल्द वे भारत छोड़ेगे, उतना ही उनके लिए अच्छा रहेगा। भारत के इस महान क्रांतिकारी ने वायसराय लार्ड हॉर्डिंग को सबक सिखाने की ठानी। रास बिहारी, अवध बिहारी, भाई बाल मुकुंद, मास्टर अमीर चंद्र और वसंत कुमार विश्वास ने 23 दिसंबर 1912 को चांदनी चौक पर हार्डिंग पर बम फेंका जो दिल्ली में एक बड़े जुलूस के साथ अपनी सवारी निकाल रहा था।

क्रांतिकारी हार्डिंग की हेकड़ी निकलना चाहते थे जो भारतीयों पर कहर बरपाने के लिए तरह-तरह के हुक्म जारी करता था। हार्डिंग की किस्मत अच्छी थी, जिससे वह इस हमले में बच निकला लेकिन वह घायल हो गया। इस घटना के बाद गोरी हुकूमत ने आजादी के दीवानों पर दमन चक्र तेज कर दिया और चंादनी चौक की घटना में शामिल क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए व्यापक अभियान छेड़ा। ऐसे भी कई लोग गिरफ्तार कर लिए गए, जिनका इस घटना से कोई लेना देना नहीं था।

इस बम कांड में शामिल सभी क्रांतिकारी पकड़ लिए गए, लेकिन रास बिहारी बोस हाथ नहीं आए और वह भेष बदलकर जापान जा पहुंचे। मास्टर अमीर चंद्र, भाई बाल मुकुंद और अवध बिहारी को आठ मई 1915 को फांसी पर लटका दिया गया। वसंत कुमार विश्वास को अगले दिन नौ मई को फांसी दी गई।

उधर, जापान में रहकर रास बिहारी ने दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में रह रहे भारतीयों को एकजुट करने का काम किया और उनके सहयोग से 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' की स्थापना की। सैन्य अधिकारी मोहन सिंह के सहयोग से उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के भारतीय युद्धबंदियों को लेकर इंडियन नेशनल आर्मी [आजाद हिंद फौज] की स्थापना की। बाद में इसकी कमान नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सौंप दी गई।

जापान की राजधानी तोक्यो में 21 जनवरी 1945 को रास बिहारी का निधन हुआ। जापान सरकार ने उन्हें 'आर्डर आफ द राइजिंग सन' सम्मान से नवाजा। 

सभी मैनपुरी वासीयों की ओर से भारत माता के इस सच्चे सपूत को शत शत नमन  |

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी जानकारी दी आजादी के आन्दोलन में कितने लोगों ने अपनी आहुति दी पर कितनी को तो हम जानते ही नहीं और कुछ का बस नाम भर सुना है | आप की पोस्ट हम सभी की जानकारी और बढ़ा रही है इसके लिए धन्यवाद |
    रास बिहारी बोस जी को मेरी तरफ से नमन : |

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  2. इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह गये इस नायक को याद कर आपने हमें झकझोरा। आभार।

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  3. श्राद्धावनत हूँ और शर्मिंदा भी कि इतिहास के सच्चे हीरो को याद करने के लिये किसी के याद दिलाने पर याद आता है!!

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