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शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

७३ वीं जयंती पर विशेष - एक बौछार था वो शख्स


आज ८ फरवरी है ... आज ग़ज़ल सम्राट स्व॰ जगजीत सिंह साहब की ७३ वीं जयंती है ... जगजीत सिंह जी किसी परिचय के मोहताज नहीं ... गुलजार साहब उनके बारे मे कुछ यूं बयां करते है ...
 
एक बौछार था वो -

एक बौछार था वो शख्स
बिना बरसे
किसी अब्र की सहमी सी नमी से
जो भिगो देता था

एक बौछार ही था वो
जो कभी धूप की अफ़शां भर के दूर तक
सुनते हुए चेहरों पे छिड़क देता था...
नीम तारीक से हॉल में आँखें चमक उठती थीं

सिर हिलाता था कभी झूम के टहनी की तरह
लगता था झोंका हवा का है
कोई छेड़ गया है..

गुनगुनाता था तो खुलते हुए बादल की तरह
मुस्कुराहट में कई तर्बों की झनकार छुपी थी

गली क़ासिम से चली एक ग़ज़ल की झनाकर था वो
एक अवाज़ की बौछार था वो 



ग़ज़ल सम्राट स्व ॰ जगजीत सिंह साहब को शत शत नमन !

7 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन फनकार और शख्सियत पर किसी महान इंसान सुंदर शब्द ...!!
    श्रद्धांजलि मेरी ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. काश कि वो आवाज़ सदा हमारे साथ रहती.....
    miss you jagjit ji :-(
    चाक जिगर के सी लेते हैं.....जैसे भी हो जी लेते हैं.....

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  3. ग़ज़ल सम्राट स्व ॰ जगजीत सिंह साहब को शत शत नमन !

    उत्तर देंहटाएं
  4. दो सरदार!! गुलज़ार साब और जगजीत सिंह!! उनसे बेहतर कोइ उस आव्वाज़ को बयां ही नहीं कर सकता! आवाज़ के उस जादूगर को सलाम!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी इस प्रस्तुति को आज की जगजीत सिंह जी की 73वीं जयंती पर विशेष बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

    उत्तर देंहटाएं

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