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सोमवार, 31 मार्च 2014

बुरा भला ने पूरे किए ५ साल


लो जी आज आप सब का यह ब्लॉग 'बुरा भला' पूरे ५ साल का हो गया है | ३१ मार्च २००९ को युही बनाये इस ब्लॉग को आप सब का भरपूर प्यार मिला ... और आगे भी मिलता रहेगा ... यही आशा है !

तो हो जाए पार्टी ???










अब क्यों कि 'बुरा भला' मेरा सब से पहला ब्लॉग है सो यह भी कहा जा सकते है एक ब्लॉगर के रूप में आज मेरा भी जन्मदिन है ... ;-)

यहाँ इस ब्लॉग की सब से पहली पोस्ट का लिंक दे रहा हूँ :- 
 
वेदना

खुशनसीब हूँ इस ब्लोगिंग के मार्फत ही आप सब से मिलना हुआ ... कुछ बहुत अच्छे दोस्त मिले ... कुछ लोगो से गिले शिकवे भी रहे ... है भी ... और शायद रहे भी ... पर फिर भी ब्लोगिंग बेहद रास आई ... इस मे कोई शक नहीं है !

५ साल कैसे और कब बीत गए पता ही नहीं चला ! ऐसे ही स्नेह बनाएँ रखें यही अनुरोध है !

आपकी और अपनी ओर से ...

हैप्पी बर्थड़े 'बुरा भला' 

शनिवार, 29 मार्च 2014

आज भड़की थी प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की ज्वाला


आज २९ मार्च है ... आज ही के दिन सन १८५७ के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पाण्डेय ने विद्रोह की शुरुआत की थी |
जब गाय व सुअर कि चर्बी लगे कारतूस इस्तमाल मे लेने का आदेश हुआ तब बैरकपुर छावनी में बंगाल नेटिव इन्फैण्ट्री की ३४वीं रेजीमेण्ट में सिपाही मंगल पाण्डेय ने मना करते हुए विरोध जताया इसके परिणाम स्वरूप उनके हथियार छीन लिये जाने व वर्दी उतार लेने का फौजी हुक्म हुआ। 

मंगल पाण्डेय ने उस आदेश को मानने से इनकार कर दिया और २९ मार्च सन् १८५७ को उनकी राइफल छीनने के लिये आगे बढे अंग्रेज अफसर मेजर ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया। आक्रमण करने से पूर्व उन्होंने अपने अन्य साथियों से उनका साथ देने का आह्वान भी किया था किन्तु कोर्ट मार्शल के डर से जब किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया तो उन्होंने अपनी ही रायफल से उस अंग्रेज अधिकारी मेजर ह्यूसन को मौत के घाट उतार दिया जो उनकी वर्दी उतारने और रायफल छीनने को आगे आया था। 

इसके बाद मंगल पाण्डेय को अंग्रेज सिपाहियों ने पकड लिया। उन पर कोर्ट मार्शल द्वारा मुकदमा चलाकर ६ अप्रैल १८५७ को मौत की सजा सुना दी गयी। कोर्ट मार्शल के अनुसार उन्हें १८ अप्रैल १८५७ को फाँसी दी जानी थी, परन्तु इस निर्णय की प्रतिक्रिया कहीं विकराल रूप न ले ले, इसी कूट रणनीति के तहत क्रूर ब्रिटिश सरकार ने मंगल पाण्डेय को निर्धारित तिथि से दस दिन पूर्व ही ८ अप्रैल सन् १८५७ को फाँसी पर लटका कर मार डाला।

भारत के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के इस अग्रदूत अमर शहीद मंगल पाण्डेय जी को हम सब शत शत नमन करते है !!

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