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मंगलवार, 17 जनवरी 2017

'द ग्रेटेस्ट' मुहम्मद अली की ७५ वीं जयंती

मुहम्मद अली (जन्म कैसियस मर्सलास क्ले, जूनियर; जनवरी 17, 1942 - जून 3, 2016) पूर्व अमेरिकी पेशेवर मुक्केबाज थे, जिन्हें खेल इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा हेवीवेट मुक्केबाज कहा जाता है। उन्हें बीबीसी से स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी ऑफ द सेंचुरी तथा स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड द्वारा स्पोर्ट्समैन ऑफ द सेंचुरी का सम्मान मिल चुका है। अखाड़े में अली अपने फुटवर्क और मुक्के के लिए जाने जाते थे। अली 3 बार हेवीवेट चैम्पियन भी रहे।
व्यक्तिगत जीवन
इन्होंने चार शादियां की थीं और इनके नौ बच्चे हैं। इनमें इनकी एक बेटी लैला अली पेशेवर महिला मुक्केबाज हैं। इन्होंने 1964 में सोंजी रोई से पहली शादी की। दो वर्ष बाद 1966 में ये दोनों अलग हो गए। इन्होंने 26 फरवरी 1965 को इन्होंने अपना नाम मोहम्मद अली रख लिया तथा खुद को अश्वेत मुस्लिम घोषित किया। इन्होंने अपने मुस्लिम धर्म की बात रखते हुए अमेरिकी सेना से जुड़ने से मना कर दिया। सेना से जुड़ने से मना करने के कारण न्यूयॉर्क स्टेट एथलेटिक कमीशन ने इन्हें बॉक्सिंग के लाइसेंस से वंचित कर दिया।
ह्यूस्टन की जूरी ने इन्हें धोखाधड़ी के आरोप में 5 वर्ष की जेल और 10 हजार डॉलर की सजा सुनाई। इनका पासपोर्ट भी जब्त कर लिया गया था परंतु अपील करने के बाद इस सजा को 10 दिन का कर दिया गया। इन्होंने अगस्त 1967 में बेलिंडा बॉयड से दूसरी शादी की। उन्हें तीन लड़कियां और एक लड़का हुआ। 1976 में ये दोनों भी अलग हो गए|
खेल करियर
इन्होंने पहली बार 1964 में फिर 1974 में और फिर 1978 में विश्व चैंपियनशिप का ख़िताब जीता था। अली ने 1979 में पहली बार संन्यास की घोषणा की, लेकिन 1980 में उन्होंने रिंग में वापसी की लेकिन नए विश्व चैंपियन लैरी होम्स से ये हार गए। मुकाबले को 11वें राउंड में रोका दिया गया। अली 1981 में बॉक्सिंग से वास्तविक रूप में रिटायरमेंट ले लिया। इनके खाते में 56 जीत 37 नॉकआउट और महज 5 हार शामिल हैं।
निधन
2 जून 2016 को इन्हें साँस की समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जिस के बाद ३ जून को उनका निधन हो गया | 1984 से ये पारकिंसन की बीमारी से पीड़ित थे। इससे पहले पेशाब की नली में संक्रमण की शिकायत की वजह से दिसंबर 2014 में भी ये अस्पताल में भर्ती हुए थे।
'द ग्रेटेस्ट' मुहम्मद अली को हम सब अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि देते है और सादर नमन करते हैं !!

रविवार, 15 जनवरी 2017

६९ वां भारतीय सेना दिवस

फील्ड मार्शल कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा
आज १५ जनवरी है ... आज ही दिन सन १९४८ मे फील्ड मार्शल कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा ने भारतीय सेना के पहले कमांडर इन चीफ़ के रूप मे कार्यभार संभाला था ... तब से ले कर आज तक हर साल १५ जनवरी को भारतीय सेना अपना सेना दिवस मनाती आई है ! हर साल इस दिन भारतीय सेना का हर एक जवान राष्ट्र के प्रति अपने समर्पण की कसम को दोहराता है और एक बार फिर मुस्तैदी से तैनात हो जाता है राष्ट्र सेवा के लिए ! इस दिन की शुरुआत दिल्ली के अमर जवान ज्योति पर शहीदों को सलामी दे कर की जाती है ! इस साल भारतीय सेना अपना ६ वां सेना दिवस मना रही है ! 

सैनिक.... आखिर एक सैनिक की क्या पहचान है। देश के लिए मर मिटनें का जज्बा लिए एक वीर सैनिक जब देश पर शहीद होनें निकल पडता है तो फ़िर उस समय न वह देश में फ़ैले भ्रष्टाचार के बारे में सोचता है और न ही किसी राजनीतिक नफ़े नुकसान का आंकलन ही करता है। अब साहब हैरानी तब होती है जब अपनें समाज के ही कुछ "बुद्धिजीवी" अपनी ही सेना पर ही व्यंग्य कस देते है वह भी ऐसा जिसके बारे में सोच कर भी हैरानी होती है । अजी जनाब सेना क्या करती है जानना है तो फ़िर ज़रा समाचार पत्र पर नज़र डालिए... 

अगर प्रिंस खड्डे में गिरे तो निकालनें के लिए सेना, मुम्बई में बाढ आ जाए तो सेना, कोई भी आपदा आए तो सेना, अजी अगर नेताओं की सुरक्षा हो तो सेना, अगर कहीं जाना हो तो सेना, अगर आपकी तीर्थ यात्रा हो तो सेना, आपकी ट्रेन फ़ंसे तो सेना और आपके पुल टूटे तो सेना.. जब सरकारी ठेकेदार कामनवेल्थ का ब्रिज गिरा दे तब उसे चौबीस घंटे में खडा करे सेना.. अजी जनाब सेना से आप कुछ भी करा लीजिए आज तक सेना नें मना किया है? तो फ़िर ऐसे में नेताओं की तरह सेना पर बयान बाज़ी से बचिए... ज़िम्मेदारी का परिचय दीजिए और सेना की कद्र कीजिए। 

आज ६९ वें सेना दिवस के मौके पर डा ॰ हरिवंशराय बच्चन की कविता यहाँ सांझा कर रहा हूँ !
 
चल मरदाने, सीना ताने,
हाथ हिलाते, पांव बढाते,
मन मुस्काते, गाते गीत ।

एक हमारा देश, हमारा वेश, 

हमारी कौम, हमारी मंज़िल, 
हम किससे भयभीत ।

चल मरदाने, सीना ताने,
हाथ हिलाते, पांव बढाते,
मन मुस्काते, गाते गीत ।

हम भारत की अमर जवानी,
सागर की लहरें लासानी,
गंग-जमुन के निर्मल पानी,
हिमगिरि की ऊंची पेशानी
सबके प्रेरक, रक्षक, मीत ।

चल मरदाने, सीना ताने,
हाथ हिलाते, पांव बढाते,
मन मुस्काते, गाते गीत ।

जग के पथ पर जो न रुकेगा,
जो न झुकेगा, जो न मुडेगा,
उसका जीवन, उसकी जीत ।

 

चल मरदाने, सीना ताने,
हाथ हिलाते, पांव बढाते,
मन मुस्काते, गाते गीत । 
- डा ॰ हरिवंशराय बच्चन 
 जय हिन्द ... जय हिन्द की सेना !!!

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