सदस्य

 

सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

क्या करूँ कि तुम बहुत याद आती हो ...

जीवन में कभी कभी कुछ दिन ऐसे आ जाते है जब आप यह तय नहीं कर पाते कि खुश हो या दुखी ... ऐसा ही एक दिन मेरे जीवन में आज से ठीक ५ साल पहले आया था | 

७ फरवरी २००६ के दिन यूँ तो तय था कि मेरे विवाह का योग है ... और आखिर तक हुआ भी यही ... पर इस बीच कुछ ऐसा घटा जिस ने ज़िन्दगी बदल दी ना सिर्फ़ मेरी पर मेरे बड़े भाई विक्रम की भी ... !!

विक्रम मेरी बुआ जी के लड़के है और दिल्ली में रहते है अपने परिवार के साथ | उस दिन सुबह से ही घर में भागम भाग थी ... सालो बाद घर में शादी थी ... और वह भी घर में इकलौते लड़के की ... हर तरफ रोनक और चहल पहल ... बीच बीच में ढोलक की थाप और महिलायों के मंगल गीत गाने की आवाजे ... पर मैं मन ही मन डरा हुआ था ... सरिता बुआ काफी दिनों से बीमार थी ... विक्रम भईया से रोज़ हाल चाल तो ले रहा था ... पर कभी भी ऐसा कुछ नहीं बताया उन्होंने जिस से यह लगे कि सब ठीक है ... सो एक अनजाना सा डर घेरे हुए था ... साथ साथ घर के माहौल में भी घुला हुआ था ! पापा , अम्मा और मैं तीनो यही दुआ कर रहे थे कि बस आज का दिन भी आराम से गुज़र जाए ... कुछ ही घंटे ही तो बाकी थे ... पर होनी को कुछ और ही मंजूर था ... दोपहर के १ से १:३० के बीच का ही समय था ... ठीक से याद नहीं है अब ... मेरे मोबाइल पर एक कॉल आई ... देखा तो विक्रम भईया का नाम आ रहा था नंबर के साथ ... मेरी धड़कन वहीँ रुक गई ... जिस बात का डर था ... वह घटना घट चुकी थी ... मेरी बुआ ... मेरी शुन्नो बुआ ... जा चुकी थी ... 
मेरी प्यारी बुआ - सरिता

 
एक लम्बी लड़ाई का ऐसा अंत ... पर मुझे सच कहूँ तो ... कुछ देर बाद ... एक अजीब सा सुकून महसूस हो रहा था ... मेरी प्यारी बुआ अब चैन से सो रही थी ... हाँ जानता था ... फिर कभी ना उठने के लिए ... पर फिर भी मुझे राहत थी ... बुआ मेरी अब दर्द से आजाद थी ... फोन पर जब उनकी आवाज़ में उनका दर्द शामिल हो जाया करता था ... मैं बता नहीं सकता कलेजा हिल जाता था | बहुत खुश थी वो कि मेरी शादी हो रही है ... अक्सर ही मुझे गिनवा दिया करती थी ... देख तेरी शादी में मुझे मिलने वाली साड़ियाँ संभल कर रख लेना ... पता नहीं मैं आ सकूँ या नहीं ... शायद उनको पता था ... वो नहीं आ पाएंगी ! अम्मा से भी कहा था ... लड़की वालों से कह देना ... मेरी एक ही नन्द है ... उसकी साडी सब से अच्छी होनी चाहिए ! 

साडी आई भी सब से अच्छी उनके लिए ... पर पहनने वाली  नहीं थी ...


विक्रम भईया और मेरे बीच सिर्फ़ ११ महीने और १२ दिन का अंतर है ... जब हम दोनों छोटे थे ... तो अक्सर ही बुआ के पास सोने को ले कर लड़ा करते थे ... दोनों एकलौते ... और दोनों ही बुआ के लाडले ... बस एक फर्क था ... मैं थोडा बदमाश था सो आसानी से रोता नहीं था ... पर भईया मेरा सीधा साधा और अक्सर ही मेरी बदमाशीयों का मुख्य शिकार ... इस लिए बुआ को भईया को चुप करने के लिए उनका ही साथ देना पड़ता था | 

मेरे जिस भाई को मैं यह कह कर रुलाया करता था कि तेरी मम्मी तो गई बाज़ार तुझे नहीं ले गई ... आज उसकी मम्मी इतनी दूर जा चुकी है कि उसके साथ साथ मैं भी रो रहा हूँ ! पूरे साल एक दुसरे से अक्सर बात करने वाले हम दोनों पिछले ५ सालों से ... पता नहीं किस डर के चलते ... साल के इस एक दिन एक दुसरे से बात करने से कतराते है !

इस समय कितनी ही बातें याद आ रही है ... क्या क्या लिखूँ ... बस ... बुआ ... जहाँ भी हो अपना आशीर्वाद देना और देख देख खुश होना कि जिस आँगन में कभी तुम खेल करती थी आज तुम्हारा कार्तिक खेल रहा है !

पर बुआ ... क्या करूँ कि तुम बहुत याद आती हो ... 

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

अब लीजिये अपने खतों की खबर - यूआईएडीआई से जुड़ा डाक विभाग

इंटरनेट के युग में ग्रामीण भारत में पोस्ट आफिस और डाकिए के महत्व और प्रासंगिकता को देखते हुए सरकार ने डाक विभाग को विशिष्ट पहचान संख्या से जोड़ दिया है ताकि लोगों को उनकी चिठ्ठिया समय पर मिल सके और उन्हें अपने खतों की स्थिति के बारे में जानकारी मिल सके।
डाक विभाग और भारतीय विशिष्ठ पहचान संख्या [यूआईडीएआई] ने इस आशय के सहमति पत्र हस्ताक्षर किया है। लोग अब यह पता कर सकते हैं कि उनकी चिठ्ठी पते पर पहुंची है या नहीं। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने इस अवसर पर कहा कि भारत गावों का देश है। ग्रामीण भारत में आज भी डाकिया सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है। हम चाहते हैं कि सूचना के प्रवाह के इस माध्यम को प्रौद्योगिकी से जोड़ा जाए ताकि गावों में रहने वाले लोगों को फायदा हो। उन्होंने कहा कि आज भी गाव में जब अपनों का हालचाल जानने के लिए लोगों की निगाहें साइकिल पर आने वाले डाकिए पर लगी रही है। हम चाहते हैं कि डाक व्यवस्था को पूरी तरह से सूचना प्रौद्योगिकी से जोड़ा जाए ताकि आम लोगों को फायदा हो। डाक विभाग और यूआईडीएआई के बीच यह सहयोग इसी दिशा में एक प्रयास है जो देश में समावेशी विकास सुनिश्चित करेगा।
यूआईडीएआई के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि ने कहा कि डाक विभाग को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में यह गठजोड़ एक महत्वपूर्ण पहल है जिसके दायरे में चिठ्ठियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना, डाक से जुड़े साजो-सामान, प्रौद्योगिकी उन्नयन आदि आते हैं। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से अब लोगों को इस बात का पता चल सकेगा कि उनकी चिठ्ठी कहां है। कोई भी व्यक्ति आनलाइन माध्यम से इस बात का आग्रह कर सकता है कि उनकी चिठ्ठी पते पर पहुंची है या नहीं।
नीलेकणि ने कहा कि इसके तहत ऐसी व्यवस्था की गई है कि प्रणाली में इलेक्ट्रानिक माध्यम से फाइल को भेज दिया जाता है जांच उच्च प्रौद्योगिकी से जुड़ी होती है। इससे यह पता लगाया जाता है कि चिठ्ठी कहा हैं।
यूआईडीएआई, डाक विभाग के राष्ट्रीय नेटवर्क को उन्नत बनाना चाहती है और देश के सभी नागरिकों को विशिष्ठ सेवा से जोड़ना चाहता है।
इसके माध्यम से डाक विभाग का कारोबार बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इस अवसर पर 'फ्लैट रेट पार्सल बक्से' को भी पेश किया गया जिसके माध्यम से अब उपभोक्ताओं को पैकेजिंग की परेशानी पेश नहीं आएगी। इसके माध्यम से सामानों को सुरक्षित भेजा जाना सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह एक किलोग्राम, 2.5 किलोग्राम और 5 किलोग्राम तीन तरह का होगा। इसके स्पीड पोस्ट की तरह ही भेजा जा सकेगा।

ब्लॉग आर्काइव

Twitter