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शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

साल २०११ में समृद्धि के ११ मंत्र

नए साल से सभी की उम्मीदें बंधी होती हैं, जिनमें ढेर सारी समृद्धि की कामना भी शामिल है। लेकिन यह समृद्धि कैसे आए? यह सवाल आपके जेहन में भी होगा। समृद्धि का मत्र यही है कि सबसे पहले आप अपनी बचत को सुरक्षित करें और फिर अपने निवेश का प्रबधन इस तरीके से करें कि आपका पैसा आपके लिए काम करे, कमाई करे और खुद बढ़ता भी रहे। पेश हैं 2011 में समृद्ध होने के 11 सकल्प, जो बचत और निवेश में साल को सुखमय बना सकते हैं..
1. रहेंगे हमेशा अपडेट
सकल्प करें कि अपने निवेश और फायदे को लेकर हमेशा अपने आपको अपडेट रखेगे। अपने परिवार की जरूरत को जानेंगे और एक जिम्मेदार निवेशक बनेंगे। अपने पैसे की अहमियत समझेंगे। सबसे पहले अपने वित्ताीय लक्ष्य निर्धारित करेंगे, फिर बचत व निवेश की बुनियादी जानकारी हासिल करेंगे, ताकि कोई आपको मूर्ख न बना सके। इंटरनेट से दोस्ती करेंगे, ताकि सूचना भी मिले और रास्ते भी।
2. जरूर खरीदेंगे स्वास्थ्य बीमा
ग्यारह का सबसे अहम सकल्प कि अपना और अपने परिवार का स्वास्थ्य बीमा कराएंगे। सेहत से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं हो सकता और इलाज महंगा हो चला है। 2010 के कैशलेस बीमा के झमेले ने सबसे बड़ी सीख यही दी है कि आपके पास हेल्थ इंश्योरेन्स होना जरूरी क्यों है। स्वास्थ्य बीमा खरीदने में कोताही न करें। टैक्स बचाने वाले बीमा उत्पाद इसका विकल्प नहीं हैं। यकीन मानिए, बीमा की दुनिया में सबसे पहली पसद हेल्थ इंश्योरेन्स होनी चाहिए। 1000 रुपये का प्रीमियम ही सही, लेकिन अपने परिवार को हेल्थ इंश्योरेन्स का सुरक्षा कवच देना मत भूलिए। बीमा उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि अप्रैल 2011 की तिमाही में स्वास्थ्य बीमा खरीदना महंगा हो सकता है। जितनी जल्दी बीमा उतना सस्ता बीमा ही सबसे बड़ा मंत्र  है।
3. बैंक एफडी में कुछ बचत
सकल्प लें कि कुछ पैसा बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में रखेंगे, ताकि वक्त पर तत्काल मिल सके। महगाई दर पर दबाव के चलते बैंकों ने अपनी जमा योजनाओं पर ब्याज दर बढ़ा दी है। बैंक अभी 8.5 फीसदी तक की ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं। बैंक चाहे सार्वजनिक हो या निजी, लेकिन एक बार सभी बैंकों की ब्याज दरों पर निगाह दौड़ाएंगे। तो एक बार विभिन्न बैकों की जमा योजना की तुलना कीजिए और इस भ्रम को दिमाग से हमेशा के लिए निकाल दीजिए कि आप अपने बैंक में ही फिक्स्ड डिपॉजिट करेंगे। मुनाफे का पहला उसूल यही है कि अगर जोखिम बराबर है, तो वहा जाने में सकोच मत कीजिए, जहा मुनाफा ज्यादा है।
4. बुढ़ापे की फिक्र
हर किसी के जीवन में सांझ यानी बुढ़ापा का आना तय है। अपने जीवन की साझ को आरामदायक बनाने के लिए अभी से कुछ बचाना शुरु कर दीजिए। सकल्प कीजिये कि इस साल पेंशन स्कीम जरूर लेंगे। पेंशन के लिए सरकार की ओर देखना अब बीते दिनों की बात हो गई है। सरकारी सेवाओं में भी पेंशन की परंपरा अब खत्म हो रही है। ऐसे में नई पेंशन योजना में हर माह 1000 रुपये की बचत समझदारी है। पेंशन में बचत पर कर रियायत भी मिलती है।
5. पीपीएफ है सदाबहार
सकल्प लें कि अगर प्रॉविडेंट फंड अकाउंट नहीं है, तो कल ही खुलवाएंगे। अगर आप नौकरीशुदा है और आपका पीएफ अथवा ईपीएफ आपके नियोक्ता द्वारा जमा किया जा रहा है, तो इससे बेहतर कुछ नहीं। लेकिन हर किसी के लिए अपना पीपीएफ अकाउंट तो होना ही चाहिए। इस अकाउंट में सबसे पहले आपको जिस पैसे की बिल्कुल जरूरत नही हैं, उसे डालना चाहिए। 70,000 रुपये तक के निवेश पर कर छूट मिलती है और 8 फीसदी का कर मुक्त तयशुदा रिटर्न। बिना किसी झझट, बिना किसी जोखिम के 8 फीसदी तयशुदा रिटर्न आपमें बचत करने की एक अच्छी योजना का विकास कर सकता है।
6. शुरुआत से टैक्स प्लानिग
सकल्प लें कि मार्च में टैक्स पर नहीं सोचेंगे, बल्कि जनवरी से पूरे साल की प्लानिग करेंगे। इस बार अपना टैक्स रिटर्न वक्त पर भरेंगे। अगर अभी तक आप पैन नबर न लेने की गलती को हल्के में ले रहे हैं, तो आप एक बड़ी भूल कर रहे हैं। वक्त पर रिटर्न भरें और जितना जल्दी हो सके अपना रीफंड वापिस लेने की कोशिश करें। हो सके तो इस बार अपने रिटर्न की ई-फाइलिग करें। यकीन कीजिए ये काफी आसान और किफायती है।
7. घालमेल बिल्कुल नहीं
सकल्प लीजिये कि निवेश व बीमा को अलग रखेंगे। बीमा सुरक्षा है, निवेश मुनाफे का जरिया। इसलिए अगर जीवन बीमा नहीं है, तो जल्दी कीजिये। 2011 अच्छी खबर लेकर आया है। अच्छी खबर इसलिए कि कई कंपनिया आपके लिए ऑन लाइन बीमा की सुविधा लेकर आने वाली हैं। वितरण का खर्च कम होने की वजह से ये पालिसीज सस्ती होंगी। लेकिन यहा ध्यान देने वाली बात यह है कि आपको एंडावमेंट या कैशबैक पॅालिसी की बजाय आपको टर्म बीमा खरीदना चाहिए। अपने बीमा एजेंट से टर्म बीमा की मांग करें और अगर वह आनाकानी करता है तो मुझ से संपर्क करें |
8. घर खरीदेंगे
सकल्प कीजिए, अगर जुगाड़ बना तो एक छोटा आशियाना इस साल जुटा लेंगे। अचल सपत्तिमें निवेश सबसे चोखा है। प्रॉपर्टी बाजार साल 2011 में हल्की गिरावट का शिकार हो सकता है। जानकारों की मानें, तो सबसे ज्यादा माग 15 से 35 लाख तक के घरों में नई माग निकलेगी। नेशनल हाउसिग बैंक ने अब 5 से 15 लाख रुपए के फ्लैट की नई कैटेगरी को मजूरी दे दी है और अगर बिल्डर्स इसमें कोई योजना लेकर आते हैं, तो यह 2011 का हिट फारमूला सबित हो सकता है। मगर ध्यान रखें कि अगर आप खुद के इस्तेमाल के लिए घर खरीदना चाह रहे हैं, तो इस साल आपके लिए मौका अच्छा है। निवेश के लिहाज से अगर आप थोड़ा इंतजार करें, तो बेहतर है। क्योंकि हो सकता है कि आपको ये साल ज्यादा मुनाफा न दे पाए।
9.सोने-चादी में निवेश
सकल्प करें कि सोने-चादी में समझदारी के साथ निवेश करेंगे। 2011 में सावधान रहने की जरूरत है। सोने-चादी की कीमतें महंगाई दर और ब्याज दरों पर निर्भर करेंगी। सोने में निवेश के लिए आपको ईटीएफ का जरिया इस्तेमाल करने की सलाह है और साथ में हर माह कुछ न कुछ जोड़ने की। गोल्ड ईटीएफ में भी एक साथ पैसा न डालें और एसआईपी की तर्ज पर ही यहा भी निवेश करें।
10.स्टॉक मार्केट में रहेंगे सजग
सकल्प करें कि अगर आप शेयर बाजार को समझते हैं, तभी बाजार में उतरेंगे, वरना म्युचुअल फंड में निवेश करके आराम फरमाएंगे। बाजार में उतरते वक्त भी अपने निवेश को अलग अलग क्षेत्रों में बाटकर रखेंगे। निवेश थोड़ा-थोड़ा और हर स्तर पर करेंगे। आपके पोर्टफोलियो में ब्लूचिप और मिडकैप शेयरों का एक अच्छा सतुलन होना चाहिए। अगर आप किसी खास सेक्टर में ही हाथ आजमाना चाहते हैं, तो आप देखेंगे कि उत्पाद या सेवा की खपत सबसे ज्यादा है।
11. डायवर्सिफाइड फंड्स
सकल्प करें कि म्युचुअल फंड में डावर्सिफाइड फंड ही अच्छे हैं। 2010 की गलतियों की सबसे पहली सीख यही है कि जिसने भी डायवर्सिफाइड फंड में निवेश किया, वह सबसे ज्यादा फायदे में रहा। साल 2011 में बुनियादी ढाचे से जुड़े फंड्स मुनाफा दे सकते हैं। यानी अगर आपने पहले इस सेक्टर में निवेश किया है, तो इससे अभी निकलने का वक्त नही है। इसी तरह प्रत्यक्ष कर सहिता आने में एक और साल का वक्त बाकी है, जिसका मतलब हुआ कि ईएलएसएस का यह आखिरी साल होगा। बीते तीन सालों में इन फंड्स ने कोई फायदा नहीं दिया, इसलिए ये स्कीमें बेचने वालों के चक्कर में न पड़ें। 
(जागरण से साभार)

रविवार, 2 जनवरी 2011

जाने वह कौन सा देश ... जहाँ तुम चले गए ... !!!

३ जनवरी २०१० ... शाम के यही कोई ७ बजे होंगे ... एक फोन आता है और मेरे जीवन का बहुत कुछ एक ही झटके में बदल जाता है ... वैसे उस फोन से ठीक १० मिनट पहले ऐसा ही कुछ और भी लोगो के साथ हुआ ... पर यहाँ बात मेरी हो रही है !!

मैं जो आप सब के लिए शिवम् हूँ ... उनके लिए शीबू था ... सिर्फ़ शीबू ... उनका एकलौता भांजा ... ना आगे कुछ ना पीछे कुछ और वो मेरे एकलौते मामा ... ना आगे कुछ ना पीछे कुछ !!

मेरी ननिहाल मुरादाबाद की है ... मंडी चौक के पास ... बल्लम मोहल्ले में ! घर के आस पास लोग मुझे वकील साहब के भांजे के रूप में जानते थे जो कि कलकत्ता से हर २ -३ साल के बाद आया करता था महीने भर के लिए ! वकील साहब के भांजे के रूप में मुझे कुछ विशेष आधिकार प्राप्त थे ... जिस में प्रमुख्य था ... किसी के भी घर में घुस कर अपनी गेंद उठा लेना ... भले ही क्रिकेट खेलते हुए लगाये गए उस शोट से अगले का कितना भी नुक्सान क्यों ना हुआ हो ... कोई और बच्चा जाता तो गेंद तो छोडिये साहब ... अच्छी खासी माँ की ... बहन की ... से उसका सत्कार होता था ... पर हम ठहरे वकील साहब के भांजे ... मजाल है जो कोई हम से कुछ कह जाए !!

पर जैसा कि आप सब को मालुम है ... हर चीज़ की एक कीमत होती है ... मेरे इस ठाठ की भी थी !!

" बेटा, पान खाने चलना है ? "

"
हाँ ... हाँ ... मामा ! "

" तो चलो फिर ... अच्छा सुनो ... अपनी मामी से सब्जी वाला थैला भी ले लेना ! "

" जी मामा "

अब मामा भांजे की जोड़ी निकल ली बाज़ार में ... थोड़ी ही दूर चलने के बाद आ गई पंडित जी की पान की दुकान ...


" वकील साहब जय राम जी की ! "

" जय राम जी की ... पंडित जी ... हमारे भांजे को पान खिलाओगे ?? "

" अरे क्यों नहीं साहब ... आखिर हमारे भी तो भांजे है !! "

हम खुश ... इतनी इज्ज़त आखिर संभाले तो भी कैसे ??

अगले ही पल ... उतर गई सारी खुमारी .... जब वकील मामा ने किया यह फरमान जारी ...

" दुकान देख लो ... अब रोज़ यहाँ से हमारा पान ले जाया करना !! "

कुछ समझे आप ... नहीं ... अरे साहब ... अभी ऊपर बताया ना आपको ... ठाठ की कीमत ... यह उसकी ही किश्त थी !

मैच बहुत ही रोमांचक दौर से गुज़र रहा है ... अभी थोड़ी देर पहले ही अनुज ने पंकज को '१ टिप १ हैण्ड' के नियम के अनुसार आउट किया है और अब हम बल्लेबाजी को आये है ... अब यहाँ साफ़ कर दें कि सब बच्चो में बड़े हम ही थे सो अपनी टीम को जीताने का भार हम पर कुछ जरूरत से ज्यादा ही था ... खैर साहब ... इधर हम तैयार है ... उधर गेंदबाज़ और बाकी खिलाडी ... कि इतने में वकील साहब की आवाज़ आती है ...

" अरे भई, शीबू कभी अपने मामा के पास भी बैठ जाया करो कुछ देर ... !!! "

" जी मामा अभी आया ... बस एक ओवर बाकी है ... "

" अरे मार गोली ओवर को ... इधर आ ... "

अब जब हुकुम आ ही गया है तो मारनी ही पड़ी गोली ... पूरे मैच को ...

" जी मामा ... "

" यार ज़रा माथा दबा दे ... फिर तो तू जाने ही वाला है ... वहाँ कौन मिलेगा तुझे ... जिस का तू माथा दबाये ! "


बात सही थी ... आज भी कोई और नहीं है जो माथा दबवाता हो मेरे से ... या जिस के लिए रोज़ मैं पान लेने जाता हूँ


तब लगता था ... वकील साहब खेलने नहीं देते ... आखिर एक बच्चे से घंटे भर माथा दबवाना या उसको ले कर सब्जी के बहाने पूरे बाज़ार का चक्कर लगवाना कहाँ का तरीका है !?

आज जब पूरा एक साल होने को आ गया है आप को गए हुए ... तब समझा हूँ ... घर - बाहर की सब जिम्मेदारियों के बीच अपने एकलौते भांजे के साथ समय बिताने के बहाने थे यह सब आपके !!

ठीक गुलज़ार - पंचम की टीम जैसी अपनी भी तो एक टीम ही थी ...




या तो खुद जाओ ... या मुझे बुला लो !!

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