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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2009

तो अब गांधी के नाम से जानी जाएगी नरेगा



विभिन्न योजना-परियोजनाओं को लेकर एक ही परिवार के नाम पर शुरू करने के सवालों से घिरी सरकार ने अब महात्मा गांधी के नाम का सहारा लिया है। इसीलिए सरकार उनके जन्म दिन दो अक्तूबर पर उन्हें एक अलग तरह से श्रद्धांजलि देने जा रही है। देश के ग्रामीण बेरोजगारों को रोजी-रोटी दिलाने में अहम भूमिका वाली नरेगा को अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के नाम से जाना जाएगा। इसकी घोषणा शुक्रवार को विज्ञान भवन में आयोजित ग्राम प्रधानों के अधिवेशन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा किए जाने की उम्मीद है।
केंद्र में दोबारा सत्ता में पहुंचने का श्रेय यूपीए ने नरेगा को दिया है। इसीलिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री डाक्टर सीपी जोशी ने नरेगा को पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के नाम पर करने का मन बनाया था। इस पर सरकार के बाहर व भीतर आम राय नहीं बन पाई। अब इसे महात्मा गांधी के नाम पर करने का प्रस्ताव पास किया गया है। सूत्रों के अनुसार नरेगा के कानून होने की वजह से यह विधेयक के रूप में आगामी शीत सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2009

कुछ तो फर्क है, कि नहीं ??


सड़क पर दो कुत्ते आपस में लड़ रहे थे। पास के दुकानदार को नागवार गुजरा। उसने आवाज देकर कुत्तों को भगाना चाहा, पर कुत्ते लड़ते-भौकते ही रहे। तब दुकानदार ने सड़क से एक बड़ा-सा पत्थर उठाया और चला दिया उन कुत्तों पर। इसके पहले कि उन्हे पत्थर लगता वे दोनों रफूचक्कर हो गये। और इत्तफाकन वह पत्थर पड़ोसी की दुकान में जा गिरा और उसका शोकेस का शीशा टूट गया। वह नाराज होकर बुरा भला कहने लगा। पत्थर चलाने वाले दुकानदार ने समझाने की कोशिश की कि उसने जानबूझकर दुकान पर पत्थर नहीं फेंका था। परंतु दूसरा दुकानदार मानने को तैयार ही नहीं था। वह दुकान में हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा था। बात यों बढ़ी कि दोनों गाली-गलौज से मारपीट पर उतर आए और फिर ऐसे भिड़े कि एक का सर फट गया। मामला पुलिस तक जा पहुंचा। पुलिस मामला दर्ज कर दोनों को वैन में बिठाकर थाने ले जा रही थी कि रास्ते में लाल सिगनल पर गाड़ी रुकी। पत्थर चलाने वाले ने बाहर झांका देखा, लड़ने वाले वही दोनों कुत्ते एक जगह बैठे उनकी तरफ कातर दृष्टि से देख रहे थे। पत्थर चलाने वाले शख्स को लगा मानो वे दोनों हम पर हंस रहे हों तथा एक दूसरे से कह रहे हों, ''यार, ये तो सचमुच के लड़ गये।''
दूसरे ने कहा, ''हां यार, हमें तो लड़ने की आदत है और हमारी कहावत भी जग जाहिर है परन्तु ये तो हम से भी दो कदम आगे है।''

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