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सोमवार, 21 सितंबर 2009

बीमा दावा पर एनसीसी का अहम फैसला


राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग [एनसीसी] ने कहा है कि लड़ाई झगड़े में मारे गए किसी पालिसी धारक की आपराधिक पृष्ठभूमि के कारण कोई जीवन बीमा कंपनी नामिनी के दावा खारिज नहीं कर सकती। जब तक कि यह साबित न हो जाए कि लड़ाई मृतक ने शुरू की थी।
लाइफ इंश्योरेंस कंपनी [एलआईसी] ने 1990 में मारे गए गुलबीर सिंह के एक नामिनी के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि मृतक ने अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि छिपाई थी, जो पालिसी के नियमों के खिलाफ है।
न्यायमूर्ति अशोक भान की अध्यक्षता वाले सर्वोच्च उपभोक्ता निकाय ने कहा कि एलआईसी दावा उसी स्थिति में खारिज कर सकती है, जब साबित हो जाए कि पालिसीधारी ने ही झगड़े की शुरुआत की थी और उसमें मारा गया। एक पूर्व के फैसले पर ध्यान दिलाते हुए फैसले में कहा गया है कि यहां तक कि पालिसीधारी की पृष्ठभूमि आपराधिक होने के मामले में भी यह मानना कठिन है कि हत्या दुर्घटनावश नहीं हुई है, जब तक कि लड़ाई उसने शुरू न की हो।'
सिंह ने फरवरी, 1990 में एलआईसी की तीन पालिसी ली थीं। पालिसीधारी के मारे जाने के बाद यह बात सामने आई कि उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित थे। इस आधार पर एलआईसी ने दावा खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट कहा कि पालिसीधारी ने मांगी गई पूरी जानकारी एलआईसी को दी थी, इसलिए उस पर कोई उत्तरदायित्व नहीं बचता।

हम भी कुछ कम नहीं - अब ब्लॉगर भी बना सकते है सिक्स पैक एब्स



समीर भाई, 
इन खान बंधुयो ने कोई ठेका थोड़े ही है ले रखा है सिक्स पैक एब्स बनाने का ?? लीजिये, अब आप और मेरे जैसे लोग भी सिक्स पैक एब्स का आनंद ले सकते है | 

बस आगे पढ़ते जाईये :-

 हिंदी फिल्मों के दो सुपर स्टार शाहरुख और आमिर खान ने अपनी फिल्मों के लिए सिक्स पैक एब्स क्या बनाए, पूरे देश के युवाओं में इसकी जबरदस्त क्रेज हो गई। उन्होंने ऐसा शरीर पाने के लिए भले ही जिम में घंटों पसीना बहाया हो, रीयल लाइफ में खान-पान को थोड़ा सा व्यवस्थित करके ऐसा शरीर बनाया जा सकता है।
ब्राजील के शोधकर्ताओं का कहना है कि अच्छा स्वास्थ्य और बाडी जिम जाने से नहीं बल्कि संतुलित और पौष्टिक भोजन से मिलता है। उनका तो दावा है कि ऐसा करके अधिक वजन की समस्या से भी छुटकारा पाया जा सकता है। हालांकि सेहतमंद बने रहने में व्यायाम की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।
 
दिन में छह बार भोजन करें :

जल्दी-जल्दी में हम अक्सर नाश्ता या दिन का लंच मिस कर देते हैं। और जब भूख लगती है तो जो कुछ भी मिल जाए, उसे ही खा लेते हैं। जैसे समोसा, चिप्स या जंक फूड। शोधकर्ताओं की सलाह है कि नाश्ता 8 बजे, 11 बजे के आसपास स्नैक्स वगैरह, एक बजे दिन का भोजन और शाम चार बजे चाय के साथ हल्का स्नैक्स लिया जा सकता है। ठीक दो घंटे बाद 6 बजे के करीब रात का भोजन कर लें। रात में 9 बजे फिर हल्का नाश्ता।
 
चुनिंदा भोजन से लगाव छोड़ें :

आमतौर पर घर में बच्चों के लिए कई व्यंजनों पर प्रतिबंध रहता है। ऐसे में आगे चलकर उनकी रुचि कई भोजनों से हटती जाती है। अभिभावकों को सलाह है कि वे अपने बच्चों को शुरू से ही बादाम, बींस, साग, दूध और इससे बनी चीजें, जौ का आटा, अंडे, मक्खन, जैतून का तेल आदि के प्रति रुचि जगाएं।
 
ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थ :

पानी के अलावा मौसमी फल खूब खाएं। दूध से आपको जरूरी कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट मिलता है। बेहतर होगा भोजन के अंतराल में इनका ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। संतुलित मात्रा में काफी और चाय भी फायदेमंद है। इसके अलावा खाने में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में रेशेदार खाद्य पदार्थो को शामिल करें।

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