पूरे दिन में हमारे साथ जो जो होता है उसका ही एक लेखा जोखा " बुरा भला " के नाम से आप सब के सामने लाने का प्रयास किया है | यह जरूरी नहीं जो हमारे साथ होता है वह सब " बुरा " हो, साथ साथ यह भी एक परम सत्य है कि सब " भला " भी नहीं होता | इस ब्लॉग में हमारी कोशिश यह होगी कि दिन भर के घटनाक्रम में से हम " बुरा " और " भला " छांट कर यहाँ पेश करे |
Thursday, January 5, 2012
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शायद इसकी प्रशंसा मे शब्द कम हैं..... बहुत अच्छी प्रस्तुति.... हम केवल लाईक किये और आप ब्लाग पर ले आए..... वाह शिवम भईया आज लाज़वाब हैं.... :-)
ReplyDeleteसुंदर कविता है, कई दिनों से ढूंढ रहा था। बचपन में पढी थी। आभार
ReplyDeleteयह कविता सिर झुकाने वाली वाली है!! आज बी.एस.एफ. हेडक्वार्टर्स में भी जलसा जैसा कुछ था.. उधर से ही आ रहा हूँ अभी!!
ReplyDeleteमार्मिक रचना...
ReplyDeleteनीरज
सर झुक जाता है श्रद्धा से ऐसी रचनाओं पर.
ReplyDeleteइस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - आखिर हम जागेंगे कब....- ब्लॉग बुलेटिन
ReplyDeleteमाँ का विश्वास है ... सारे धर्म निभाएगा
ReplyDeleteus shwet himon par hari bhuja se laal rang jab girta hai..balidaan amar ho jaata hai, tab ek tiranga banta hai...sainik ko salaam , jo seema par hain aur jo desh ke andar bhi tainaat hain...bahut sundar rachna...
ReplyDeleteमार्मिक कविता ...
ReplyDeleteयद्यपि बहुत पहले सुना था इसे
जय हिंद..
ReplyDeleteएक सैनिक के मर्म को उद्धरित करती हुई सुंदर कविता ...........
ReplyDeletehamare desh ke karndhaar, hame bacha ke rakhne wale ... tumhe naman\!!
ReplyDeleteजय हिंद
ReplyDeleteक्या बेहतरीन शब्दों में सैनिक धर्म का मर्म बतलाया है.. बहुत ही बेहतरीन रचना है.. साथ-बांटने के लिए धन्यवाद..
ReplyDeleteप्यार में फर्क पर अपने विचार ज़रूर दें...