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गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

विजय दिवस पर विशेष

ऊपर दी गई इस तस्वीर को देख कर कुछ याद आया आपको ?

आज १६ दिसम्बर है ... आज ही के दिन सन १९७१ में हमारी सेना ने पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था ... और बंगलादेश की आज़ादी का रास्ता साफ़ और पुख्ता किया था ! तब से हर साल १६ दिसम्बर विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है !

आइये कुछ और तस्वीरो से उस महान दिन की यादें ताज़ा करें !











आप सब को विजय दिवस की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

जय हिंद !!!

9 टिप्‍पणियां:

  1. याद आ गया,यह उस समय का चित्र है जब हम लाहौर से पाकिस्तानियों की भैंस तक खोल लाए थे।
    जनरल नियाजी जिस आत्म समर्पण पत्र पर हस्ताक्षर कर रहे हैं लेफ़्टिनेंट जनरल जगजीत सिंग के साथ, वह पत्र भी मैने देखा है।
    यह पत्र जोधपुर के पास माता भादरिया राय के मंदिर में फ़्रेम से जड़ा हुआ लगा है। कभी उधर जाना हो तो इस एतिहासिक पत्र के मसौदे को अवश्य देखना।

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  2. एक लाख हथियार बंद पाकिस्तानी सैनिकों का समर्पण, कोई मामूली घटना नहीं थी ! भारतीय सेना का नाम इस घटना के बाद विश्व में बेग्त्रीन मन जाने लगा था ! एक पूरे देश के दो टुकड़े कर दिए थे हमारी सशस्त्र सेनाओं ने ...
    इसी दिन से ईस्ट पाकिस्तान का नाम मिट गया था !
    शुभकामनायें !

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  3. एक लाख हथियार बंद पाकिस्तानी सैनिकों का समर्पण, कोई मामूली घटना नहीं थी ! भारतीय सेना का नाम इस घटना के बाद विश्व में बेहतरीन माना जाने लगा था ! एक पूरे देश के दो टुकड़े कर दिए थे हमारी सशस्त्र सेनाओं ने ...
    इसी दिन से ईस्ट पाकिस्तान का नाम मिट गया था !
    पाकिस्तान के लिए यह दिन सबसे बुरा दिन था !
    शुभकामनायें !

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  4. ये चित्र उन तमाम स्मृतियों को ताज़ा कर गये...!
    आपने इन्हें पोस्ट किया...सधुवाद!

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  5. गुरुदेव ने जिस प्रकार इस ऐतिहासिक घटना को पहले नोर्मल फिर बोल्ड करके बताया है.. यह वास्तव में बिलकुल वैसी ही घटना है.. दुश्मन को उअके घर में घुस कर मारना.. ऊपर से हम भले नोर्मल दिखें, जब वक्त आए तो बोल्ड होकर बता देते हैं.
    विजय दिवस की बधाई!!

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  6. पर इन सबके बदले हमें मीला क्या सैनिको के सारे कामो पर नेताओ ने पानी फेर दिया आज बग्लादेश भी भारत के खिलाफ अतंकवादियो का अड्डा बनाता जा रहा है और लाहौर तक पहुच कर और एक लाख सैनिको को युद्ध बंदी बना कर भी हम कुछ भी अपने लिए उस समय भी नहीं पा सके थे |

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  7. हम छोटे छोटे होते थे तब की यह घटना हे सब याद आ गया, लेकिन यह पाकिस्तानी बेशर्म हे यह सब भुल कर फ़िर पंगे लेते हे, अब की बार इन्हे कोन बचायेगा????वंदे मातरम

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  8. जय हो! भारत ने शान से शरणागत रक्षा की अपनी परम्परा को बखूबी निभाया।

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