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गुरुवार, 12 जुलाई 2012

इस बार संजीवनी न मिली हनुमान को , नहीं रहे दारा सिंह ...

दारा सिंह (19 November 1928-12 July 2012)
बॉलीवुड के दिग्गज दारा सिंह जी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। गुरुवार सुबह साढ़े सात बजे 'रुस्तम ए हिंद' ने आखिरी सासे लीं। ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद और दवाओं के लगातार बेअसर साबित होने के बाद दारा जी को बुधवार रात उनके घर ले जाया गया था। परिजनों और बेटे बिंदू दारा सिंह की इच्छा थी कि दारा सिंह जी घर पर ही अंतिम सास लें।

दारा सिंह जी बीते दस दिन से वो मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल में भर्ती थे। उनके स्वास्थ्य में बेहतरी के लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा था। डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। ऐसे में दारा सिंह जी अंतिम वक्त में अपने घर पर रहना चाह रहे थे। दारा जी का इलाज कर रहे डॉक्टर आर के अग्रवाल ने बताया कि उनकी मौत सुबह साढ़े सात बजे हुई। दारा सिंह जी का वेंटिलेटर हटाकर उन्हें घर ले जाया गया था। डॉक्टर ने बताया कि वेंटिलेटर हटाने का फैसला बिंदू सिंह और परिवार के सदस्यों का था।
84 वर्षीय अभिनेता को सात जुलाई को दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तभी से वह आइसीयू में थे। अस्पताल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर डॉक्टर राम नारायण ने बुधवार रात कहा था कि एमआरआइ से यह पता चला है कि ऑक्सीजन की कम आपूर्ति होने के कारण उनके मस्तिष्क को काफी नुकसान पहुंचा है।
कुश्ती चैंपियन रहे दारा सिंह जी ने 50 के दशक में फिल्म जगत में कदम रखा था। 'किंग कांग' और 'फौलाद' जैसी फिल्मों से उन्हें खास पहचान मिली। उनकी अंतिम फिल्म इम्तियाज अली की 'जब वी मेट' थी। इस फिल्म में दारा सिंह जी ने करीना कपूर के दादा का किरदार निभाया था।
महान इंसान थे दारा : अमिताभ बच्चन
दारा जी के निधन की खबर आते ही देश और बॉलीवुड में शोक की लहर फैल गई। अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर कहा कि दारा सिंह जी का चरित्र वाकई हनुमान सरीखा था और वे महान व्यक्ति थे। धारावाहिक रामायण में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल ने कहा कि दारा जी  का निधन दुखी कर देने वाली खबर है। दारा जी बहुत सहनशील और समर्पित कलाकार थे। इसके अलावा प्रेम चोपड़ा, प्राण, अभिषेक बच्चन, महाबली सतपाल सहित फिल्म और खेल से जुड़ी कई हस्तियों ने दारा सिंह जी के निधन पर शोक व्यक्त किया।
इंडिया के आयरन मैन
गौरतलब है कि कई दिनों तक अभिनेता महाबली दारा सिंह जी जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद गुरुवार सुबह 7.30 बजे दुनिया से चल बसे। वह काफी दिनों तक मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती थे। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए कई दिनों तक उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था। डाक्टरों ने बताया की उनके खून में ऑक्सीजन की भारी कमी थी। उनके गांव के गुरुद्वारे में उनकी सलामती की अरदास की जा रही थी। पूरे देश ने उनकी सलामती की दुआएं मांगी। रामायण में हनुमान बनकर भगवान लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लाने वाले दारा सिंह जी अपने असल जिंदगी में मौत से नहीं लड़ पाए। ताकत के इस प्रतीक को जो बीमारी हुई थी उसे क्रॉनिक इन्फ्लेमेटरी डेमीलीटेटिंग पॉलीन्यूरोपैथी के नाम से जाना जाता है। कुश्ती की दुनिया में देश विदेश में अपनी कामयाबी का लोहा मनवाने वाले दारा सिंह जी  ने 1962 में हिंदी फिल्मों से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। पहलवानी से पहचान तो मिली ही थी, लेकिन रामायण सीरियल में हनुमान के किरदार ने दारा सिंह जी को हिंदुस्तान के दिलों में बसा दिया था।
अखाड़े से फिल्मी दुनिया का सफर
अखाड़े से फिल्मी दुनिया तक का सफर दारा सिंह जी के लिए काफी चुनौती भरा रहा। दारा सिंह रंधावा का जन्म 19 नवंबर 1928 को पंजाब के अमृतसर के धरमूचक गांव में बलवंत कौर और सूरत सिंह रंधावा के घर हुआ था।

जार्ज गारडियांको को हराकर बने विश्व चैंपियन
दारा सिंह जी अपने जमाने के विश्व प्रसिद्ध फ्रीस्टाइल पहलवान थे। उन्होंने 1959 में विश्व चैंपियन जार्ज गारडियांको को कोलकाता में कामनवेल्थ खेल में हराकर विश्व चैंपियनशिप का खिताब हासिल किया। साठ के दशक में पूरे भारत में उनकी फ्री स्टाइल कुश्तियों का बोलबाला रहा। दारा सिंह जी ने अपने घर से ही कुश्ती की शुरूआत की थी।
भारतीय कुश्ती को दिलाई पहचान
दारा सिंह जी और उनके छोटे भाई सरदारा सिंह ने मिलकर पहलवानी शुरू कर दी और धीरे-धीरे गांव के दंगलों से लेकर शहरों में कुश्तियां जीतकर अपने गांव का नाम रोशन करना शुरू कर दिया और भारत में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में जुट गए थे।
सिंगापुर से लौटकर बने चैंपियन
1947 में दारा सिंह जी सिंगापुर चले गए। वहां रहते हुए उन्होंने भारतीय स्टाइल की कुश्ती में मलेशियाई चैंपियन तरलोक सिंह को पराजित कर कुआलालंपुर में मलेशियाई कुश्ती चैंपियनशिप जीती थी। उसके बाद उनका विजयी रथ अन्य देशों की ओर चल पड़ा और एक पेशेवर पहलवान के रूप में सभी देशों में अपनी धाक जमाकर वे 1952 में भारत लौट आए। भारत आकर सन 1954 में वे भारतीय कुश्ती चैंपियन बने थे।
अपराजेय रहे दारा सिंह जी
उसके बाद उन्होंने कॉमनवेल्थ देशों का दौरा किया और विश्व चैंपियन किंगकाग को परास्त कर दिया था। दारा सिंह जी ने उन सभी देशों का एक-एक करके दौरा किया जहां फ्रीस्टाइल कुश्तियां लड़ी जाती थीं। आखिरकार अमेरिका के विश्व चैंपियन लाऊ थेज को 29 मई 1968 को पराजित कर फ्रीस्टाइल कुश्ती के विश्व चैंपियन बन गए। 1983 में उन्होंने अपराजेय पहलवान के रूप में कुश्ती से संन्यास ले लिया।
दारा सिंह जी का प्रेम
जब दारा सिंह जी ने पहलवानी के क्षेत्र में अपार लोकप्रियता प्राप्त कर ली तभी उन्हें अपनी पसंद की लड़की सुरजीत कौर मिल गई। आज दारा सिंह जी के भरे-पूरे परिवार में तीन बेटियां और दो बेटे हैं। दारा सिंह ने अपने समय की मशहूर अदाकारा मुमताज के साथ हिंदी की स्टंट फिल्मों में प्रवेश किया और कई फिल्मों में अभिनेता बने। यही नहीं कई फिल्मों में वह निर्देशक व निर्माता भी बने।
हनुमान बन बटोरी लोकप्रियता
उन्हें टीवी धारावाहिक रामायण में हनुमानजी के अभिनय से अपार लोकप्रियता मिली जिसके परिणाम स्वरूप भाजपा ने उन्हें राज्यसभा की सदस्यता भी प्रदान की। उन्होंने कई फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभाए थे। वर्ष 2007 में आई जब वी मेट उनकी आखिरी फिल्म थी। वर्ष 2002 में शरारत, 2001 में फर्ज, 2000 में दुल्हन हम ले जाएंगे, कल हो ना हो, 1999 में ज़ुल्मी, 1999 में दिल्लगी और इस तरह से अन्य कई फिल्में। लेकिन वर्ष 1976 में आई रामायण में जय बजरंग बली, हनुमानजी का किरदार निभाकर लाखों दिलों को जीत लिया था।


दारा सिंह जी को सभी मैनपुरी वासियों की ओर से शत शत नमन और विनम्र श्रद्धांजलि |

15 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमन ।

    शुक्रवार को ।

    दुखद प्रस्तुति चर्चा मंच पर ।।

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    उत्तर
    1. सुबह सुबह हनुमान जी, रामायण में आय ।

      शक्ति दिखाके हैं गए, सम्मुख सीता माय ।

      सम्मुख सीता माय, भूख जोरों से लगती ।

      बड़ी वाटिका मस्त , पुष्प-पल्लव फल सजती ।

      गए रुस्तमे हिंद, मिली मैया की अनुमत ।

      आयें लंका जार, बताओ हो न सहमत ।।

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  2. दारा सिंह जी एक शानदार व्यक्तिव के स्वामी थे .
    उन्होंने जिंदगी को भरपूर जिया .
    विनम्र श्रधांजलि .

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  3. सदी के महानायक को विनम्र श्रद्धांजलि

    उत्तर देंहटाएं
  4. दारासिंह जी, का मै हमेशा प्रसंशक रहा,उनकी अपने जमाने की कई फिल्मे देखी है लेकिन रामायण में राम भक्त हनुमान बनकर अपने कों अमर कर लिया ,,,,ऐसे महानायक को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि,,,नमन ,,,,,,

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  5. नहीं कभी दंगल में हारा,
    ऐसा महाबलि था दारा।
    नहीं मौत के आगे कुछ वश,
    इसने बड़े-बड़ों को मारा।।
    स्व.दारा सिंह को श्रद्धांजलि।

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  6. दारा सिंह जी को भावभीनी श्रद्धांजली आपने बहुत अच्छा लिखा है आपको बधाई

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  7. विनम्र श्रद्धांजलि ....
    विस्तृत प्रस्तुति के लिए आभार!

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  8. मिश्रा जी नाराज ना होईये लीजिये यहाँ भी
    जल्दी में छूट गया था !
    दारा सिंह जी को श्रद्धांजली के रुप में बहुत सुंदर आलेख !

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