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बुधवार, 7 सितंबर 2011

अजीब या रोचक ??

कल  राहुल सिंह जी  के ब्लॉग   पर इसे देख और पढ़ मैं चकरा गया शायद आपका भी यही हाल हो ... पर है यह कमाल ... न माने तो खुद ही अजमा लीजिये ... पर हाँ अपनी राय देना न भूलियेगा !




"i cdnuolt blveiee taht I cluod aulaclty uesdnatnrd waht I was rdanieg. The phaonmneal pweor of the hmuan mnid, aoccdrnig to a rscheearch at Cmabrigde Uinervtisy, it dseno't mtaetr in waht oerdr the ltteres in a wrod are, the olny iproamtnt tihng is taht the frsit and lsat ltteer be in the rghit pclae. The rset can be a taotl mses and you can sitll raed it whotuit a pboerlm. Tihs is bcuseae the huamn mnid deos not raed ervey lteter by istlef, but teh wrod as a wlohe. Azanmig huh? yaeh and I awlyas tghuhot slpeling was ipmorantt! can you raed tihs?"  
 

  हाँ जी ... तो फिर क्या राय है आपकी ...

10 टिप्‍पणियां:

  1. राहुल सिंह जी के यहाँ देखकर बस इंतज़ार में ही था.. मुझे पढ़ने में ज़रा भी दिक्कत नहीं हुई!!

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  2. पहले देख चुका हूँ, शब्द समुच्चय पढ़ते हैं हम एक बार में।

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  3. पहले देख चुका हूँ, शब्द समुच्चय पढ़ते हैं हम एक बार में।

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  4. वाकई शब्द बड़े आराम से पढ़े जा रहे हैं... पहले-पहल लगा कि लिखने में गलती कर दी है है.. वो तो थोड़ी देर बाद पता चला कि सारे के सारे ही ऐसे लिखे हैं... और जानबूझकर लिखें हैं... :-)

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  5. आश्चर्यजनक जानकारी ....
    शुभकामनायें !

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  6. यहां देख कर फिर से आनंदित हुआ, धन्‍यवाद.

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  7. अरिस्स कोर्स नया होने के बावजूद और लिपि भी नया वर्जन होने के बावजूद हम भी पढ गए हो .....एक गजब का मनोविज्ञान महसूस हुआ कमाल है } बहुत बढिया प्रयोग है

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  8. रोचक है। इसे देख कर तो लगता है कि भविष्य में अभिव्यक्ति, शब्द और व्याकरण के मानक उखाड़ फेंकेगी।

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