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गुरुवार, 15 सितंबर 2011

मिलिए हृदेश से ...

वैसे तो कहते है कि लोगो के सामने उनकी तारीफ नहीं की जाती पर कुछ लोग इस का अपवाद बन जाते है |
उनमे से ही एक है श्री हृदेश सिंह , ब्यूरो चीफ , हिन्दुस्तान , मैनपुरी |

मैनपुरी के मेदेपुर गाँव में जन्मे पले बड़े हृदेश ने किताबी ज्ञान मैनपुरी,आगरा,गाजियाबाद और दिल्ली में लिया |
दुनियादारी की समझ हुई तो बी की पढाई के साथ ही दैनिक जागरण मैं ५०० रुपये में नौकरी की जबकि इनका पूरा परिवार प्रसाशनिक सेवा में है | घर में बड़े भाई और पुरा परिवार के प्रसाशनिक सेवा में होने के बाद भी इन्होने प्रसासनिक सेवा की तेयारी करने की बजाये पत्रकारिता करने की ठानी और बरस २००४-५ में  भारतीय जन संचार संसथान नई दिल्ली से डिग्री ली| कुछ समय डीडी न्यूज़ में भी काम किया | देहरादून में अमर उजाला में सब-एडिटर बन काम किया,फ़िर बी जी फिल्म्स,न्यूज़ २४ आदि चैनल्स में भी अनुभव लेते रहे | इन सब के बावजूद हमेशा ही इनको यह लगता रहा कि मेरा असली काम इन जगहों पर नहीं परन्तु कही और है ...........
.............पर कहाँ ????????
बहुत सोचने पर जवाब मिला मैनपुरी !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

जिसको भी बताया उसीने मजाक उडाया | पर किसी ने ठीक ही कहा है कि "रौशनी गर खुदा को हो मंज़ूर , आंधियो में चिराग जलते है ||"

आप मैनपुरी वापस आ गए|

मैनपुरी की जनता को जागरूक बनाने के मकसद से सत्यम न्यूज़ चैनल की शुरुआत की। शुरूआती मुश्किलात के बाद हृदेश और उनका सत्यम न्यूज़ चैनल दिन रात उन्नति के पथ पर बड़ता रहा |

मैनपुरी जैसे पिछडे जनपद में पत्रकारिता के जरिये लोगों को आवाज़ बलन्द करने के लिए नेशनल जोय्तिबा फूले फेलोशिप अवार्ड मिला साथ - साथ बेस्ट जर्नलिस्ट ऑफ़ दा इयर और बेस्ट यंग जर्नलिस्ट अवार्ड भी मिले| मैनपुरी का नाम पुरे विश्व में रोशन हो यही उनका मकसद है ||

आजकल हृदेश लोकप्रिय हिंदी दैनिक अखबार 'हिन्दुस्तान' के मैनपुरी कार्यालय में 'ब्यूरो चीफ' के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे है | 

पेश है उन से हुयी एक ख़ास मुलाकात के कुछ अंश ...

* आपका स्वागत है परिकल्पना  ब्लॉग उत्सव-२०११ में
   * शुक्रिया
   * आप पत्रकारिता में कब से हैं ?
   * 11 वर्ष हो चुके हैं.बी.ए.की पढाई के साथ ही पत्रकारिता से जुड़ गया .
   * हिंदी पत्रकारिता से जुड़कर आपको कैसा महसूस हुआ ?
   * बेहद अच्छा.मैं बचपन से ही पत्रकारिता करना चाहता था.पत्रकारिता
में आने के बाद दुनिया को समझने में काफी मदद मिली.
   * आपकी नज़रों में साहित्य-संस्कृति और समाज का वर्त्तमान स्वरुप क्या है?
   * विकसित हो रहा है.नए तरह का साहित्य-संस्कृति और समाज सामने आरहा
है.लोग पसंद कर रहे हैं
   * आज ब्लॉगिंग लोगों के सर चढ़कर बोल रही है, इसे न्यू मीडिया कहा जा
रहा है इसकी  दिशा दशा पर आपकी क्या राय है ?

   * बिलकुल ये होना ही था.आवाज़ में असर हो तो वो माध्यम तलाश कर ही
लेती है.ब्लोगिंग के आने से लोगों को जेहनी तौर पर सकून मिला है.
   * आपकी नज़रों में हिंदी ब्लॉगिंग का भविष्य कैसा है ?
   * शानदार.चूँकि अभी इसमें बहुत गुंजाईश है.
   * हिंदी के विकास में इंटरनेट कितना कारगर सिद्ध हो सकता है ?
   * बेहद कारगर.इंटरनेट को हिंदी से और हिंदी को इंटरनेट से मजबूती मिलेगी.
  * आपने जब पत्रकारिता में कदम रखा तो उस समय की परिस्थितियाँ कैसी थी ?
   *  कंप्यूटर का इस्तेमाल शुरू हो गया था.अख़बार तेज़ी से रंगीन हो रहे
थे.ख़बरों के साथ प्रस्तुतीकरण पर भी ध्यान दिया जाने लगा था.
   *  जो गंभीर लेखन करता है क्या उसे ब्लॉग लेखन करना चाहिए या नहीं ?
   * क्यों नहीं...ब्लॉग सीधी बात कहने का शानदार मध्याम है.
   * आजकल क्या आप ब्लोगिंग कर पाते है ? पहले तो आप काफी सक्रिय थे ... ब्लोगिंग से मेरा परिचय भी आप ने ही करवाया था !
   * अफ़सोस यही है कि आजकल ब्लोगिंग कुछ छुट सी गयी है ... पर बहुत जल्द फिर से शुरू करने कि सोच रहा हूँ !
   * आप ब्लोगिंग ख़ास कर हिंदी ब्लोगिंग से कैसे और कब जुड़े ?
   * दो साल पहले ही हिंदी ब्लोगिंग से मेरे परिचय हुआ था ... सत्यम न्यूज़ मैनपुरी के नाम से ब्लॉग भी बनाया और काफी लिखा भी ... पर अब समय निकालना बहुत मुश्किल हो जाता है !
   * विचारधारा और रूप की भिन्नता के वाबजूद पत्रकारिता कई महत्वपूर्ण
मुद्दों पर  संगठित नहीं हो पाता इसका क्या कारण है ?

   * पहले तो मीडिया में कोई एजेंडा सेटिंग नहीं है.हाँ इसे अगर नई
तरक्की से जुड़ा जाये तो ऐसा हो सकता है.
   * आज के परिरचनात्मक दृश्य में अपनी जड़ों के प्रति रचनात्मक  विकलता
क्यों नहीं दिखाई देती ?

   * अनुभवों की कमी.
   * आपकी नज़रों में सामाजिक  संवेदना का मुख्य आधार क्या होना चाहिए ?
   * चिंतन.
   * आज की पत्रकारिता अपनी देसी जमीन के स्पर्श से वंचित क्यों है ?
   * नया नजरिया की कमी.
   * क्या हिंदी ब्लोगिंग यानी न्यू मीडिया में नया सृजनात्मक आघात देने
की ताक़त छिपी हुई है ?

   * बिलकुल.
   * पत्रकारिता  से जुड़े कोई सुखद संस्मरण बताएं ?
   * मेरी एक खबर से एक बच्चे को पढने के लिए स्कूल भेजा गया.
   * कुछ व्यक्तिगत जीवन से जुड़े सुखद पहलू हों तो बताएं ?
   * जब में पिता बना.
   * परिकल्पना ब्लॉग उत्सव की सफलता के सन्दर्भ में कुछ सुझाव देना चाहेंगे आप ?
   * अधिक से अधिक ब्लोगर जुड़ें.नए सुझावों पर महेनत की जाये.
   * नए ब्लॉगर  के लिए कुछ आपकी व्यक्तिगत राय ?
   * सिस्टम को समझें.जानकारी या होम  वर्क करें.फिर लिखें.और ऐसा लिखे
जो हिंदुस्तान के विकास में सहायक हो. 

हृदेश आपने इतना व्यस्त होते हुए भी मुझे और परिकल्पना  ब्लॉग उत्सव-२०११ को अपना कीमती समय दिया ... आपका बहुत बहुत धन्यवाद  और आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं !

इस इंटरव्‍यू को पढने के लिए आप यहाँ भी जा सकते है ...

7 टिप्‍पणियां:

  1. शुभकामनाएं हृदेश जी और आपके लिए भी.

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह ..
    बहुत बढिया इंटरव्‍यू ले लिया ..
    हृदयेश जी को शुभकामनाएं !!

    उत्तर देंहटाएं
  3. इंटरव्यू को साझा करने और एक सुलझे व्यक्तित्व से परिचय कराने के लिए धन्यवाद! हृदयेश जी के लिए हमारी शुभकामनाएं!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. युवाओं का सृजनात्मक लेखन किसी भी समाज और देश का भविष्य निश्चित करता है....... सुदृढ़ करता है. आप दोनों इसी भावना के संवाहक हैं. आप दोनों अपने ध्येय में सफल हों....यही शुभकामना है. हृदेश के साथ साथ शिवम् को भी बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  5. हृदेश जी और आपको शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं

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