सदस्य

नयी पोस्ट की जानकारी लें ईमेल से

 

शनिवार, 31 मई 2014

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर एक लघु कथा

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर एक लघु कथा
---------------------------------------

जिला पुस्तकालय में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस की संगोष्ठी में लम्बा भाषण देने के बाद जब ठाकुर साहब मंच से नीचे आये तो चौबे बैठे दिख गए ... झट लपक लिए उनकी ओर और तपाक से बोले ... "बोलत बोलत मौह थक गओ ... चौबे जी नेक सी कपूरी दियो ।"

4 टिप्‍पणियां:

  1. :-)
    औरों को नसीहत खुद मियां फजीहत !!

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. आज की ब्लॉग बुलेटिन विश्व तम्बाकू निषेध दिवस.... ब्‍लॉग बुलेटिन में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ...
    सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  3. जय हो , असल में इन दिवसों को मनाए जाने की औपचारिकता के पीछे अक्सर कोई ऐसा ही सच निकल कर सामने आता है , सीख देती लघुकथा

    उत्तर देंहटाएं
  4. मराठी में भी इसके लिये एक कहावत है, लोका सांगे ब्रम्हज्ञान, स्वतः कोरडे पाषाण। अर्थ अनु जी की कहावत वाला ही।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियों की मुझे प्रतीक्षा रहती है,आप अपना अमूल्य समय मेरे लिए निकालते हैं। इसके लिए कृतज्ञता एवं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

ब्लॉग आर्काइव

Twitter