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मंगलवार, 17 नवंबर 2009

बस एक सवाल - कमेन्ट मोडरेशन सही या ग़लत ??

आज आप सब की राय लेना चाहता हूँ | हम में से बहुत से लोगो ने अपने अपने ब्लोगों पर कमेन्ट मोडरेशन लगाया हुआ है - कुछ मित्र इसे ग़लत भी मानते है जैसा कि मुझे बताया गया एक कमेन्ट के द्वारा,"आपने मोडरेशन लगाया हुआ है, यहाँ गलत है | शायद आप अपनी आलोचना नहीं सुन सकते |"
इनको तो जवाब मैंने दे दिया पर समझ नहीं आया कि क्या यह सच में ग़लत है ?? अगर नहीं तो मुझे यह क्यों कहा गया ??
सो आप सब से विनती है कि इस विषय पर मुझे अपनी राय जरूर दे !

कमेन्ट मोडरेशन सही या ग़लत ??

10 टिप्‍पणियां:

  1. Shivam ji .......... main yeh nahi bata sakta ki yeh galat hai ya sahi........ isey aap apni zaroorat ke mutabik laga sakte hain.......

    abhi aap meri is wali post

    pe dekhyiyega.... kisi ne mujhe anonymous ban ke gaali di hai.... lekin main kya kar sakta tha.... muskura ke rah gaya....

    maine bhi kaha ki do bhai gaali.... lekin moderation nahi lagaunga.....

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  2. बिल्‍कुल भी गलत नहीं है। आप अपने ब्‍लॉग पर किसे रखना चाहें, किसे नहीं, यह केवल आपका अधिकार है। लेकिन मॉडरेशन इसलिए भी सही है क्‍योंकि इससे स्‍वचालित स्‍पैमर्स पर रोक लगती है। नमस्‍कार।

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  3. जब कोई आपको बेकार कमेंट दे जैसे "गलत बोले, स्पैम कमेंट,आदी" तो आप माडीरेटर आन कर दिजीये और फिर जब लगे की अब सब ठिक हो गया तो फिर आफ कर दिजीये।

    कई बार कमेंट माडीरेटर आन कर के निस्चींत रहते है ईसलिये अगर आपको ठिक लग रहा है तो आन कर दिजीये।


    + कमेंट माडीरेटर आन करने के कई कारण है।
    १. ईमेज वेरीफिकेसन हटा कर कमेंट माडीरेटर आन।
    २. स्पैम कमेंट, बहुत सारे एक ही कमेंट से बचना, अपने ब्लाग पढने वाले ब्लागर को बचाना ताकी कोई उनको कूछ नही कहे।


    मै कई वर्षॊं से ब्लागींग मे लगा हूवा हूं और अगर कोई आलोचना करता तो मै भी आलोचना कर देता था। पर धीरे धीरे एहसास होता गया की अगर कोई आपकी आलोचना कर रहा है तो बस उसकी बात धयान मे रख कर उसकी मूस्किलों को दुर करने की कोशीस करीये।



    कमेंट माडीरेट सही है पर गलत नही है।
    99.9% कमेंट माडीरेटर को वोट

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  4. अरे भाई यह आप का ब्लांग है, आप जो मर्जी चाहे करे,आप ने सही किया है, या गलत यह आप को पता है फ़िर फ़िक्र क्यो.... मस्त रहे...जिस ने टिपण्णी देनी है दे, नही देनी ना दे... आप ने कोई गलत नही किया

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  5. कमेंट मॉडरेशन का अर्थ यह कतई नहीं है कि हम अपनी आलोचना नहीं सुनना चाहते या नहीं सुन सकते किन्तु हमारे प्लेटफार्म पर कोई आकर गंदगी फैलाए या किसी अन्य के लिए या हमारे लिए असभ्य भाषा का प्रयोग करे, तो उसे रोक तो सकते ही हैं.

    अगर ऐसी भाषायुक्त कमेंट मिले तो डिलिट कर देने से कमेंटकर्ता का गंदगी फैलाने का उद्देश्य विफल हो जाता है और वो हताश होकर ऐसी हरकतें बन्द कर देता है.

    अतः मेरा मानना है कमेंट मॉडारेशन सर्वथा उपयुक्त है.

    लोग कहते हैं कि ऐसे कमेंट बाद में डिलीट किए जा सकते हैं मगर उसका फायदा क्या जब दस लोग उसे पढ़ ही चुके हों.

    बाकी तो स्वविवेक की बात है.

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  6. मेरा अनुभव कहता है थोडी सी भी हिम्‍मतत रखो तो दरवाजा खुला रखो अन्‍यथा चैन तो सात तालों में भी नहीं मिलेगी,
    भाई जो लोग कुप्रचारी होते हैं मेरी ख्‍वाहिश होती है वह मोडरेट लगा लें, इससे बृलाग की आधी कमर टूट जाती है, जो नहीं लगाते उनके लिये मेरे पास सुपर वाइरस है, सारा ब्लागजगत जाने है ऐसे ही हम Rank-3 ब्लागर नहीं बन गये जबकि ब्लागवाणी नाम का डंडा हमारे पास नहीं है,

    मुहम्‍मद उमर कैरानवी
    Page Rank-3 ब्‍लाग islaminhindi.blogspot.com
    नोटः उपरोक्‍त एकमात्र ब्लाग ब्लागवाणी पर रजिस्‍टर्ड नहीं है

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  7. जब आप कोई ब्लोग बनाते हैं तो आप उस ब्लोग के मालिक बन जाते हैं और मालिक को अधिकार होता है कि अपने ब्लोग में किस टिप्पणी को प्रकाशित होने दे और किसे नहीं। ब्लोग एक प्रकार से आपका घर है। क्या आप चाहेंगे कि कोई आपके घर के भीतर घुस कर गाली दे? मॉडरेशन आपकी वह शक्ति और अधिकार है जिसके द्वारा आप घर घुस कर गाली देने वाले को धक्के देकर घर से बाहर निकाल सकते हैं।

    जो लोग कहते हैं कि "शायद आप अपनी आलोचना नहीं सुन सकते" उनसे मेरा भी एक प्रश्न है कि किसने आपको अधिकार दिया है किसी की आलोचना करने का? क्या किसी ने पीले चाँवल भेज कर न्यौता दिया था आपको अपने ब्लॉग में आने के लिये? और निवदेन किया था कि मेरी आलोचना करो? यदि कोई अपनी आलोचना नहीं सुन सकता तो भी आपको अधिकार नहीं है उसे दोषी कहने का। क्यों सुने कोई अपनी आलोचना?

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  8. एकदम गलत है, टिप्पणीकार को झुंझलाहट देने के सिवाए और कोई ख़ास उपयोगिता इसकी नहीं, ऐसा मेरा मानना है क्योंकि यदि टिपण्णी पसंद नहीं तो आपके पास डिलीट का ओपसन उपलब्ध है ब्लॉगर जिसको दिप्पनी दी गई है और टिप्पणीकर्ता को भी !

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  9. जब तक आपको कोई तंग ना करे तब तक गलत वर्ना सही...
    नीरज

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  10. .
    .
    .
    आदरणीय पी.सी.गोदियाल जी से सहमत,

    आदरणीय अवधिया जी से असहमत...अगर कोई आलोचना नहीं सुन सकता तो जरूरत ही क्या है ब्लॉगिंग जैसे पब्लिक डोमेन के और लोकतांत्रिक माध्यम में अपने विचारों को अभिव्यक्त करने का?
    'मीठा मीठा गप और दूसरा कोई स्वाद थू'... यह ब्लॉगिंग में नहीं चल सकता...

    उत्तर देंहटाएं

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