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मंगलवार, 29 सितंबर 2009

अक्टूबर-दिसंबर में पॉलीमर नोट भी अर्थव्यस्था में शामिल होंगे



भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी समस्या के रूप में उभरे नकली नोटों के परिचालन की समस्या पर केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक सख्त कदम उठा रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद अक्टूबर-दिसंबर में पॉलीमर नोट भी अर्थव्यस्था में शामिल होंगे। शुरुआत 10 रुपये के नोट से की जाएगी।
नकली नोटों का परिचालन रोकने और नोटों का जीवन बढ़ाने के लिए आरबीआई ने पॉलीमर की करेंसी लाने का निर्णय किया था। इस परियोजना को इसी तिमाही अंतिम रूप देने की तैयारी है। मंगलवार को शहर आये आरबीआई के महाराष्ट्र-गोवा के क्षेत्रीय निदेशक व आरबीआई बोर्ड के सदस्य जेबी भोरिया ने कहा कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद तीन माह में ये नोट जारी कर दिये जाने की उम्मीद है। इन नोटों के लिए पालीमर की आपूर्ति आस्ट्रेलिया से मंगाया जाएगा। छपाई की जिम्मेदारी नासिक और देवास सहित केंद्र सरकार के दो और आरबीआई के दो प्रेस को दिये जाने की उम्मीद है। वर्तमान में कागज की करेंसी इन्हीं प्रेसों में छापी जा रही है। इन्हें छापने की शुरुआत छोटे मूल्य के नोटों से की जायेगी, क्योंकि कम मूल्य के नोट ज्यादा परिचालन में होते हैं। कागज के नोटों की तुलना में पॉलीमर के नोटों की छपाई कुछ महंगी होगी, लेकिन जीवन कई गुना ज्यादा होगा। इनके परिचालन से कटे-फटे नोटों को बदलने और इनके निस्तारण की समस्या भी धीरे-धीरे खत्म हो जायेगी। कम मूल्य के नोटों की सफलता के बाद ज्यादा मूल्य के नोट भी छापे जाएंगे। कागज के पुराने नोट पूर्व की तरह परिचालन में रहेंगे। आरबीआई द्वारा कागज के नोटों में डाले जा रहे गुप्त चिह्न, स्याही और कागज की नकल होने के बाद समय-समय पर इन्हें बदलने के निर्देश हैं।

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