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बुधवार, 23 सितंबर 2009

अब तीखी मिर्च से बनेंगे ग्रेनेड

मिर्ची खाने वाले इस बात से बखूबी वाकिफ हैं कि मिर्च तीखी हो तो कान से धुंआ बनकर निकलती है, लेकिन क्या आपने कभी चिली ग्रेनेड के बारे में सुना है। देश के रक्षा वैज्ञानिक अब तीखी मिर्च से ग्रेनेड बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
असम के तेजपुर स्थित डिफेंस रिसर्च लेबोरेटरी [डीआरएल] ने अनुसंधान के बाद निष्कर्ष निकाला है कि दुनिया की सबसे तीखी मिर्च 'भूत जोलोकिया ' को ग्रेनेड में तब्दील किया जा सकता है और यह घातक भी नहीं होगा। भारतीय मिर्च की एक तेजतर्रार किस्म भूत जोलोकिया को नागा मिर्च भी कहा जाता है। यह अमेरिका को निर्यात की जाती है। यह वहां के लोगों के भोजन का एक प्रमुख हिस्सा है।
वर्ष 2007 में गिनीज बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकार्ड ने भूत जोलोकिया को सर्वाधिक तीखी मिर्च घोषित किया था। इस मिर्च का करिश्मा यहीं तक नहीं है। डीआरएल के वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका पाउडर तैयार कर, उसे जानवरों को दूर भगाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।
डीआरएल के वैज्ञानिक तीखे स्वाद वाली इस मिर्च से ग्रेनेड बनाने की कोशिश में हैं। भीड़ को तितर-बितर करने और अन्य उद्देश्यों के लिए पुलिस और सेना इस ग्रेनेड का इस्तेमाल कर सकते हैं। डीआरएल के वैज्ञानिक आर पी श्रीवास्तव ने बताया कि 'चिली ग्रेनेड' की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यह घातक प्रकृति का नहीं होगा। उन्होंने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करना हो या चरमपंथियों को उनके ठिकाने से बाहर निकालना हो, चिली ग्रेनेड लक्ष्य को भौतिक रूप से कोई नुकसान पहुंचाए बिना, अपना काम कर लेगा।
डीआरडीओ और विश्व वन्यजीव कोष भी मिर्च से ऐसा पाउडर तैयार करने के लिए प्रयासरत हैं, जिसे जंगली हाथियों को दूर भगाने के लिए रस्सियों और बाड़ पर लगाया जा सके। पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में जंगली हाथी तबाही मचाते हैं।
इस सिलसिले में एक प्रायोगिक परियोजना पर काम चल रहा है। इसके लिए मजबूत वनस्पति रेशों से जूट की बाड़ तैयार कर उस पर भूत जोलोकिया का पाउडर छिड़क दिया गया ताकि जंगली हाथी इसके करीब न आ सकें। हाथियों को पास न फटकने देने के लिए इस मिर्च के इस्तेमाल से कुछ और प्रयोग भी किए गए जो सफल रहे हैं। अब असम सरकार मिर्च की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक परियोजना पर काम कर रही है। भूत जोलोकिया मिर्च नगालैंड और असम की खासियत है।
राज्य के कृषि विभाग ने अपने वानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग को चयनित इलाकों में मिर्च की इस किस्म का उत्पादन करने का निर्देश दिया है। कृषि मंत्री प्रमिला रानी ब्रह्म ने बताया कि शुरू में मिर्च की खेती के लिए दो जिलों गोलाघाट और बक्सा को चुना गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल 300 हेक्टेयर भूमि में इस मिर्च की खेती की जाएगी जिससे अच्छा राजस्व मिलने की संभावना है।
भोजन में मसाले के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली मिर्च पेट की बीमारियां दूर करने में मददगार होती है। इसे हृदयघात के लिए भी अच्छा इलाज माना जाता है।

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