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रविवार, 13 सितंबर 2009

बाजार की तेज रफ्तार में पिछड़ीं दिग्गज कंपनियां

मंदी से बाहर निकल रहे शेयर बाजार ने बीते एक साल में तेज दौड़ लगाई है। इसके बावजूद शेयर बाजार की कई बड़ी कंपनियां ऐसी भी हैं जो बाजार की रफ्तार के मुताबिक अपनी चाल बनाए रखने में कामयाब नहीं हो सकीं।
बीते एक साल में बंबई स्टाक एक्सचेंज [बीएसई] का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स तो दो हजार अंक उछलकर 16.17 प्रतिशत का रिटर्न दे गया। इसी सेंसेक्स में शामिल करीब एक तिहाई कंपनियां ऐसी भी हैं जो उसके रिटर्न के नजदीक भी नहीं पहुंची। इन कंपनियों के निवेशकों को या तो अपने निवेश में नुकसान उठाना पड़ा है या फिर उनका रिटर्न सेंसेक्स के रिटर्न से भी कम रहा है। कई कंपनियों का रिटर्न तो नेशनल स्टाक एक्सचेंज के सूचकांक निफ्टी के 14.22 प्रतिशत से भी नीचे रहा है। सेंसेक्स कंपनियों पर आधारित म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश करने वाले निवेशकों के रिटर्न पर भी इसका असर दिख सकता है। पिछले साल यानी 12 सितंबर 2008 को बंबई स्टाक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 14000.81 अंक पर बंद हुआ था। इसके ठीक एक साल बाद यानी शुक्रवार 11 सितंबर 2009 को सेंसेक्स दो हजार से ज्यादा अंक चढ़कर 16264.30 प्रतिशत पर पहुंच गया है, लेकिन सेंसेक्स में शामिल नौ कंपनियां इस रफ्तार को नहीं पकड़ पाई हैं। बाजार की दिग्गज मानी जानी वालीं रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, ओएनजीसी जैसी कंपनियां तो सेंसेक्स से बुरी तरह पिछड़ी हैं। इस एक साल में रिलायंस का रिटर्न 7.8 प्रतिशत, भारती एयरटेल का 8.7 प्रतिशत और ओएनजीसी का 13.61 प्रतिशत रहा है।
वैसे बीते एक साल में भी शेयर बाजार ने तेज उतार-चढ़ाव देखे हैं। लेकिन मई 2009 में केंद्र में नई सरकार बनने के बाद शेयर बाजार में तेजी की धारणा बनी और सेंसेक्स के ऊपर की तरफ चढ़ने की रफ्तार भी बढ़ी। इस रफ्तार में शेयर बाजार की दूसरी कंपनियों ने भी दौड़ लगाई। लेकिन ये नौ कंपनियां अलग-अलग वजहों से इस दौड़ से बाहर हो गई। बीते एक साल की इस अवधि में सबसे कम रिटर्न दिया हिंडाल्को और हिंदुस्तान यूनी लीवर [एचयूएल] ने। हिंडाल्को का रिटर्न रहा 2.5 और एचयूएल का 2.83 प्रतिशत। दिलचस्प बात यह है कि सेंसेक्स में शामिल इन दोनों की ही समकक्ष कंपनियां स्टरलाइट और आईटीसी सेंसेक्स के रिटर्न को पछाड़ने में सफल रही हैं। लेकिन हिंडाल्को और एचयूएल ऐसा नहीं कर पाई हैं।
सेंसेक्स की रफ्तार से पिछड़ी इन नौ कंपनियों में दो ऐसी भी हैं जिनमें निवेशकों को बीते एक साल में अपने निवेश पर नुकसान उठाना पड़ा है। ये दो कंपनियां हैं अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस और टाटा स्टील। अगर किसी निवेशक ने 12 सितंबर 2008 को इन दोनों कंपनियों में निवेश किया तो उन्हें आज की तारीख में रिलायंस कम्युनिकेशंस में 25.33 प्रतिशत का और टाटा स्टील में 10.86 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ा है। स्टील और टेलीकाम दोनों ही ऐसे क्षेत्र रहे हैं जिनकी वृद्धि दर पिछले एक साल में धीमी रही है। स्टील में विश्वव्यापी स्तर पर मांग में कमी आई है।
सेंसेक्स में रीयल एस्टेट क्षेत्र की एकमात्र प्रतिनिधि डीएलएफ भी रिटर्न के मामले में सेंसेक्स से पीछे रही है। बीता पूरा साल रीयल एस्टेट क्षेत्र के लिए खराब गुजरा है। अमेरिका में इसका बुलबुला फूटने के बाद भारत में भी रीयल एस्टेट कंपनियों को भारी मंदी से गुजरना पड़ा है। वित्त की भारी कमी के चलते इन कंपनियों को अपने कई प्रोजेक्ट भी रोकने पड़े। यही वजह है कि डीएलएफ के शेयरों के दामों में बीते एक साल में मात्र 14.8 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हो पाई है।
बीते एक साल में सेंसेक्स कंपनियों में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाला क्षेत्र रहा है आईटी। सेंसेक्स में शामिल इस क्षेत्र की सभी कंपनियों ने तीस प्रतिशत के आसपास रिटर्न दिया है। इन्फोसिस, टीसीएस और विप्रो इन सभी का प्रदर्शन इस दौरान शानदार रहा है। इसके बाद बुनियादी और इंजीनियरिंग क्षेत्र की कंपनियां है जिन्होंने सामान्य से कहीं ज्यादा रिटर्न दिया है। इनमें भेल, एलएंडटी, रिलायंस इंफ्रा जैसी कंपनियां शामिल हैं।
विश्लेषक -   नितिन प्रधान

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