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बुधवार, 22 जुलाई 2009

श्याम बाबु की 'वेल डन अब्बा' राजनीति पर कटाक्ष


बॉलीवुड में समांतर सिनेमा के शिल्पकार श्याम बेनेगल ने कहा है कि उनकी आने वाली फिल्म वेल डन अब्बा राजनीति पर कटाक्ष करती हुई हास्य फिल्म है, जिसमें पारिवारिक तानेबाने के बीच मध्यम वर्ग की कहानी को पर्दे पर पेश करने का प्रयास किया गया है।

अंकुर, निशांत, मंथन, भूमिका, सूरज का सातवां घोड़ा, जुनून, जुबैदा, वेलकम टू सज्जनपुर जैसी फिल्मों से भारतीय सिनेमा को व्यापक आधार प्रदान करने वाले बेनेगल ने कहा मेरी फिल्म वेल डन अब्बा की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है जिसमें बोमन ईरानी, मीनिषा लाम्बा, समीर दत्तानी, इला अरूण आदि कलाकारों ने अभिनय किया है। अंकुर, निशांत, मंथन, जुबैदा जैसी गंभीर कथानक पर आधारित फिल्म बनाने के बाद हास्य फिल्मों की ओर रुख करने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इससे पहले मैंने वेलकम टू सज्जनपुर बनाई थी। जो समाज पर कटाक्ष करती हास्य फिल्म थी जबकि वेल डन अब्बा राजनीति पर कटाक्ष करती हास्य फिल्म है। बेनेगल ने कहा कि मेरे हास्य फिल्म बनाने पर कुछ लोगों को आश्चर्य हो सकता है, लेकिन मेरे लिए यह आश्चर्य की बात नहीं क्योंकि मैं अच्छी स्क्रिप्ट मिलने पर ही फिल्में बनाता हूं, चाहे वह गंभीर कथानक पर आधारित फिल्म हो या हास परिहास। बेनेगल ने कहा कि हास्य फिल्म बनाने में काफी हद तक मेरा व्यक्तिगत अनुभव सहायक रहा है और बदलते समय में मैं लोगों को स्वस्थ माहौल में पूरे परिवार के साथ बैठकर हंसने का मौका देना चाहता था और वेल डन अब्बा इसी प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने कहा चूंकि वेल डन अब्बा पारिवारिक तानेबाने के बीच मध्यम वर्ग के संघर्ष को दर्शाती हास्य-व्यंग्यात्मक फिल्म है। इसलिए इसके एक हिस्से की शूटिंग हैदराबाद के इब्रहमपट्टनम के पास एक गांव में हुई है।

उन्होंने कहा कि वेल डन अब्बा मूलरूप से मुंबई में काम करने वाले एक ड्राइवर अरमान अली बोमन ईरानी की कहानी है जो हैदराबाद के पास एक छोटे से गांव में रहने वाली अपनी बेटी के लिए सुयोग्य वर की तलाश में अपनी कंपनी से एक महीने की छुट्टी लेता है। बेनेगल ने कहा कि लेकिन अरमान तीन महीने बाद लौटता है और उसका युवा मालिक उसे नौकरी से हटाना चाहता है। मनोनीत राज्यसभा सदस्य श्याम बेनेगल ने देश में शिक्षा के प्रचार प्रसार में फिल्म, टेलीविजन और मीडिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि सरकार को मौखिक शिक्षा की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए और देश के छोटे से छोटे गांव तक शिक्षा के प्रसार के लिए टेलीविजन जैसे प्रभावशाली माध्यम का इस्तेमाल करना चाहिए।

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