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गुरुवार, 30 जुलाई 2009

चीन की दीवार ढहने से दबी दलाल स्ट्रीट


चीन के शेयर बाजार में आई भारी गिरावट ने दलाल स्ट्रीट का भी दम निकाल दिया। विदेशी फंडों ने रीयल एस्टेट व मेटल कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली कर सेंसेक्स को लगातार तीसरे दिन गिरावट का शिकार बना डाला। इसके चलते बंबई शेयर बाजार [बीएसई] का यह संवेदी सूचकांक भारी उठापटक के बीच बुधवार को 158.48 अंक यानी करीब एक फीसदी लुढ़ककर 15173.46 पर बंद हुआ। एक दिन पहले यह 15331.46 अंक पर बंद हुआ था। इसी तरह नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी भी 50.60 अंक गिरकर 4513.50 पर बंद हुआ। मंगलवार को यह 4564.10 अंक पर था।

चीन की सरकार द्वारा तेजी चढ़ते बाजार को ठंडा करने के कदम उठाने की आशंका में शंघाई शेयर सूचकांक में 5 फीसदी की भारी गिरावट आई। इसके असर से 15379.43 अंक का ऊंचा स्तर छू चुका बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स दोपहर के लगभग 444 अंक लुढ़क सत्र के निचले स्तर 14888.41 पर आ गया। हालांकि बाद में खुले यूरोपीय बाजारों में बढ़त देख यह संभलकर 15 हजार के ऊपर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी ऊंचे में 4537.85 व नीचे में 4420.80 अंक के दायरे में रहा। जुलाई के डेरिवेटिव सौदों का निपटान गुरुवार को होना है। इसके मद्देनजर कारोबारियों के सौदों के निपटारे में जुटे रहने से भी बाजार धारणा में कमजोरी आई। कंपनियों के बेहतर वित्तीय नतीजों की बदौलत बीते दो सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में तेजी का दौर चला था।

ताजा बिकवाली की सबसे ज्यादा मार रीयल एस्टेट व मेटल कंपनियों पर पड़ी। हाल ही में इन्हीं कंपनियों के शेयरों में तगड़ी तेजी दर्ज की गई थी। यही वजह रही कि रीयल एस्टेट सूचकांक 4.36 और मेटल सूचकांक 2.31 फीसदी नीचे बंद हुए। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी, कैपिटल गुड्स कंपनियों से जुड़े सूचकांकों में भी खासी गिरावट देखी गई। वहीं आईटी और आयल एंड गैस सूचकांकों ने बिकवाली के माहौल में बढ़त का हौसला दिखाया। मिडकैप व स्मालकैप सूचकांकों में भी करीब एक फीसदी का नुकसान दर्ज हुआ। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में केवल 7 के शेयर फायदे में रहे, जबकि 23 घाटे में बंद हुए।

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