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सोमवार, 27 जुलाई 2009

अब फिर से छाने लगा हरिजन एक्ट के दुरुपयोग का खौफ

बसपा राज में दलित उत्पीड़न! सहज विश्वास नहीं होता। परंतु इस जिले में जिस तेजी से दलित उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं उससे तो कुछ ऐसा ही महसूस होता है। दलित उत्पीड़न से जुडे़ मामलों में यूं तो पुलिस बड़ी तेजी से कार्रवाई करती है परंतु फिर भी उत्पीड़न से जुड़ी घटनाओं का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि सरकार ने भी उत्पीड़न से जुडे़ कानून को लागू करने के लिये पुलिस को आवश्यक दिशा निर्देश दे रखे हैं मगर फिर भी इस कानून के दुरुपयोग के कई मामले जिले में सामने आये हैं। जिला समाज कल्याण विभाग के आंकडे़ चौकाने वाले हैं। पिछले तीन माह 15 दिनों में हरिजन उत्पीड़न से जुडे़ ृ123 मामलों को समाज कल्याण विभाग ने 23 लाख 56 हजार रुपये की बड़ी राशि को पीड़ितों के परिजनों के खाते में भेजा है।

जनपद में हरिजन उत्पीड़न से जुडे़ मामले बसपा सरकार में बढे़ हैं इसमें संदेह नहीं है। ये बात अलग है कि बढ़े हुये मामलों की असलियत कुछ और है। बसपा के सत्ता में आते ही एससी/एसटी एक्ट को जिले भर में खौफ के रूप में प्रचारित किया गया। विपक्षियों ने खूब प्रचारित किया कि अब इस एक्ट का दुरुपयोग जमकर होगा। परंतु बसपा सुप्रीमो ने इस कानून का दुरुपयोग न हो इसके लिये नई गाइड लाइन तैयार की जिसके तहत निर्देश दिये गये कि इस अधिनियम का किसी भी स्थिति में दुरुपयोग न होने दिया जाये। एससी,एसटी एक्ट के तहत उन्हीं मामलों में कार्रवाई की जाये जहां वास्तव में इस प्रकार का अपराध किया गया हो। मामूली विवादों में इस कानून के प्रयोग की मनाही की गयी। दलित हत्या और दलित से बलात्कार से जुडे़ मामलों में इस कानून की धारा को अनिवार्य रूप से जोडे़ जाने के निर्देश भी दिये गये थे। स्पष्ट किया गया कि मुकद्दमा दर्ज करने से पहले इस कानून की धारा लागू करने के लिये मामले की पूरी तरह जांच कर ली जाये। सरकार के इन निर्देशों के चलते इस कानून को लेकर लोगों में छाया खौफ कम हुआ था इसमें संदेह नहीं है मगर जिस तरह से जिले में इस कानून का बड़ी संख्या में प्रयोग होने लगा है उससे सरकार के निर्देश पर उंगलियां उठने लगी हैं। थाना बरनाहल क्षेत्र के ग्राम निबहरा के अंवरीश मिश्रा का मामला हो या डालूपुर के एक ब्राह्माण परिवार के मामले की बात हो या फिर हाल ही में थाना क्षेत्र के ग्राम जैतपुर निवासी एक बैंक कर्मी पर हरिजन एक्ट का मुकद्दमा दर्ज कराने का मामला रहा हो ये सभी मामले आम जनता की नजरों में नितांत झूठे रहे हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन इस कानून को लेकर अत्यधिक सतर्क भी है। फिर भी कानून से जुडे़ मामलों की संख्या घटने की बजाय बढ़ ही रही है।

हम बता दें कि सरकार ने एससीएसटी एक्ट में हत्या के मामले में कमाने वाले व्यक्ति के परिजन को दो लाख और न कमाने वाले व्यक्ति के परिजन को एक लाख रुपये तथा बलात्कार के मामले में 50 हजार रुपये एवं अन्य उत्पीड़न से जुडे़ मामलों में 25 हजार रुपये देने की व्यवस्था विभिन्न स्तरों पर कर रखी है। इस धनराशि को लेने के लिये भी इस कानून के दुरुपयोग के मामले पहले भी हुये है और वर्तमान में भी हो रहे हैं। जिला समाज कल्याण विभाग के आंकडे़ हरिजन उत्पीड़न के बढे़ हुये मामलों की गवाही देते है |


2 टिप्‍पणियां:

  1. शायद दुरुपयोग करने वालों को रोक पाना संभव ही नहीं दिखता है.

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  2. आप की बात एकदम सही है....विचारोत्तेजक और सोचने को मजबूर करता बहुत अच्छा लेख....

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