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बुधवार, 1 जुलाई 2009

विद्युत आपूर्ति का नया रोस्टर लागू......कहाँ है जनप्रतिनीधि ?

विद्युत कटौती को लेकर दीवानी कलक्ट्रेट के वकीलों की चल रही हड़ताल के बीच जिला प्रशासन द्वारा तय किए गए नए रोस्टर को प्रशासन ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही शासन ने आपूर्ति का नया रोस्टर भी जारी किया है। इसी नए रोस्टर के अनुसार मंगलवार से विद्युत आपूर्ति शुरू भी हो गयी।

शासन ने जिले के शहरी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग अलग नए सिरे से जो रोस्टर जारी किया है उसके तहत शहरी क्षेत्र को दोपहर 2 बजे से रात्रि 9 बजे तथा रात्रि एक बजे से प्रात: 9 बजे तक एवं ग्रामीण क्षेत्र में रात्रि 11 बजे से प्रात: 9 बजे तक विद्युत आपूर्ति होगी। मतलब शहरी क्षेत्र में प्रात: 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक तथा ग्रामीण क्षेत्र में प्रात: 9 बजे से रात्रि 11 बजे तक विद्युत कटौती की जाएगी। कटौती के इस नए शिडयूल को लेकर आक्रोश के स्वर फैलने लगे है|

उधर विद्युत कटौती की वजह से अब पानी का संकट गहराने लगा है। टंकी के पानी की आपूर्ति हो पानी से अब इण्डिया मार्का हैण्डपम्पों पर मारामारी मचने लगी। महिलायें नलों पर लम्बी कतारें लगाकर पहले बारी आने के इंतजार में घंटों खड़ी रहती है।

शहर के मुहल्ला ककरईया, भरतवाल, अग्रवाल, जीवालाल कालोनी आदि पूरा शहर अब पानी की समस्या से पीड़ित है। पानी की समय से सप्लाई होने का कारण विद्युत आपूर्ति की समय सीमा में बराबर कटौती बताया जा रहा है। अब तो पीने के पानी का संकट इतना गहरा गया है कि इण्डिया मार्का हैण्डपम्पों पर पानी भरने को लेकर महिलाओं में हाय तौबा होने लगा है। एक तरह भीषण गर्मी और दूसरी तरफ पानी का संकट लोगों को परेशान कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि हैण्डपम्पों के पानी की सैम्पलिग कराने के निवर्तमान जिलाधिकारी ने दिये थे जिससे पता चल सके किसी हैण्डपम्प का पानी से संक्रमित तो नहीं है। सैम्पलिग न होने से लोग गली कूचे में लगे हैण्डपम्पों का पानी पी रहे है, जिसके कारण संक्रामक रोग फैलने लगे हैं।

कहाँ
है जनपद के सारे नेता ? आज कहाँ है वोह सब ? क्यों मैनपुरी की आम जनता इतने कष्ट उठा रही है ? क्यों कोई संगठित आन्दोलन नहीं होता ? क्यों सिर्फ़ समाचार पत्रों में अपनी अपनी फोटो छपवाने के किए विरोध का दिखावा होता है ? सब की सब राजनेतिक पार्टिया अपने अपने वरिष्ट नेता की चापलूसी में ही क्यों वयस्त है, किसी का जन्मदिन मनाया जा रहा है तो किसी की मूर्ति लग रही है कोई अपनी जीती हुयी सीट से किसी और को लड़वाने की तैयारी में लगा है तो कोई चुनावों में हार का दोष किस के सर डाला जाए इसी में लगा है | जनता मरती रहे क्या फर्क पड़ता है , एक मरेगा तो चार पैदा होगे शायद कुछ एसा ही सोचते है हमारे नेता | चाहे कोई भी पार्टी क्यों हो सब अपना अपना फायेदा ही सोचती है |

ग़ालिब का एक शेर याद आता है ,

हुआ है "शाह का मुसाहिब",फिरे है इतराता,
वगरना शहर में ग़ालिब तेरी आबरू क्या है?



सच में इन लोगो की कोई आबरू नहीं रही जब हमे ख़ुद ही सब समस्यों से झूझना है तो कहे के और किस काम के यह नेता ????

अब समय गया है कि हम सब खुदमुख्तार बने, और अपनी आवाज़ ख़ुद बुलंद करे ||


जय हिंद |


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