सदस्य

नयी पोस्ट की जानकारी लें ईमेल से

 

बुधवार, 8 अप्रैल 2009

मैं मैनपुरी हूँ.....


मैं मैनपुरी हूँ.....

कभी मुझे अपने उपर गुरुर था।

मेरे शहर के लोग बेहद ज़हीन और इल्म पसंद थे।

लोग एक दुसरे से मोहब्बत से मिलते थे.जबान और बयान मैं अंतर नही था।

दिलो मैं हर एक के लिए अदब था.हर और खुशी थी मासूमों के चेहरे पर खुदा का नूर था।

जेहन मैं इंसानियत थी.मैं रोशन थी.......मैं मैनपुरी थी......

आज मैं उदास हूँ मेरे शहर के लोग परेशान हैं।

सियासी नही है फ़िर भी हेरान हैं।

वक्त थम गया है लोग रुक गए हैं।

जेहन मैं नफरत है.मोहब्बत और खुलूस दिलो से दूर है जबान तल्ख है.

मैं मैनपुरी हूँ .....मुझे मोहब्बत पसंद है

कोई आए समझाए की मैं वो ही हूँ .....जहाँ हर दिल एक है....

बुजुर्गों का सरमाया ही यहाँ के लोगों के असली जागीर है.......

मैं मैनपुरी हूँ.....

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर ,सशक्त अभिव्यक्ति के लिए शुभकामनायें ,स्वागत आपका ,
    लिखते रहिये ,यह तेवर आपको आगे ले जायेंगे
    आपका ही
    डॉ.भूपेन्द्र

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपका हिंदी ब्लॉग की दुनिया में स्वागत है... और श्री हनुमान जी की जयंती पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छा लिखा है . मेरा भी साईट देखे और टिप्पणी दे

    उत्तर देंहटाएं
  5. सही लिखा हृदेश जी.पढ़ कर दिल भर आया.जब मैं मैनपुरी आता हूँ तो दिल भर आता है.यहाँ के लोग अभी भी पूरी तरह से जागरूक नहीं है.आपका प्रयास बेहद कबीलेतारीफ है.आपको दिल से बधाई.सुधीर शाक्य
    नॉएडा

    उत्तर देंहटाएं
  6. Saans jaane bojh kaise jivan ka dhoti rahi
    Nayan bin ashru rahe par zindagi roti rahi.

    Ek mahal ke bistare pe sote rahe kutte billiyaan
    Dhoop me pichwaade ek bachchi choti soti rahi .

    Ek naajuk khwaab ka anzaam kuch easa hua
    Main tadapta raha idhar wo us taraf roti rahi

    Tang aakar Muflisi se khudkushi kar li magar
    Do ghaz qafan ko laash uski baat johati rahi

    Bookh gharibi,laachari ne umar tak peecha kiya
    Mehnat ke rookh par zardian tan pe phati dhoti rahi

    Aaj to us maa ne jaise - taise bachche sulaa diye
    Kal ki fikr par raat bhar daaman bhigoti rahi.

    “Deepak” basher ki khawahishon ka qad itna bad gaya
    Khawahishon ki bheed me kahi zindagi khoti rahi.
    @ Kavi Deepak Sharma
    http://www.kavideepaksharma.co.in
    http://www.shayardeepaksharma.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियों की मुझे प्रतीक्षा रहती है,आप अपना अमूल्य समय मेरे लिए निकालते हैं। इसके लिए कृतज्ञता एवं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

ब्लॉग आर्काइव

Twitter