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गुरुवार, 2 अप्रैल 2009

भला - बुरा ,बुरा - भला ||



भला बुरा , बुरा भला है ,खोटे पर सब खरा भला है |
झूट सच का क्या पता है ,एक गम एक बड़ी बला है ,
चल ढाल सब एक जैसी ,सारा कुछ ही नापा तुला है |
सच के सर जब धुँआ उठे तो ,झूट आग में जला हुआ है ,
भला बुरा ,बुरा भला है ,खोटे पर सब खरा भला है |
काला है तो काला होगा ,मौत का ही मसाला होगा,
चूना कत्था ज़िन्दगी तो सुपारी जैसा छाला होगा |
पाप ने जना नहीं तो पापियों ने पाला होगा,
भूख से निकल गया था ,भूख से निकला होगा |
भला बुरा , बुरा भला है ,खोटे पर सब खरा भला है |
वोह जो अब कहीं नहीं है उस पे भी तो यकीं नहीं है ,
रहेता है जो फलक फलक पे ,उसका घर भी ज़मी नहीं है |
अक्कल का ख्याल अगर हो , शक्ल से भी हसी नहीं है ,
पहेले हर जगह पे था वोह, सुना है अब वोह कहीं नहीं है |
बुरा भला है , भला बुरा है ||

----- गुलज़ार

1 टिप्पणी:

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